लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कालीन नगरी में प्रशासन हाई अलर्ट पर देखा जा रहा है। पुलिस के जवान जगह-जगह सड़कों पर पैदल मार्च करते देखे गए। कालीनों के ताने-बाने की तरह कालीन की नगरी भदोही में हिंदू व मुस्लिम समाज के बीच एक अलग तरह की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम है। कारोबार से लेकर एक दूसरे के तीज-त्योहारों व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में दोनों पक्षों के लोग पारस्परिक सौहार्द, भाई चारे व सामंजस्य के साथ जश्न मनाते हैं। बावजूद इसके अराजक तत्वों व विरोधियों को खलल डालने का कोई मौका ना मिले इसलिए प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड़ पर है। पुलिस व सुरक्षा बल के जवान जनपद के विभिन्न शहरों, घनी बस्तियों एवं अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के बीच पैदल ग्रस्त करते देखे जा सकते हैं। हालांकि कालीन नगरी में फिलहाल लॉ एंड ऑडर्र की स्थिति बेहद सुरक्षित है।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि सूबे के सबसे छोटे जनपद भदोही में वक्फ की कुल 444 संपत्तियों हैं, जिसमें मस्जिद, कब्रिस्तान, इमाम बाड़ा, कर्बला, मजार, ईदगाह, रौंजा तो कुछ जमीन खाली पड़ी है। वर्ष 1987 में जनपद में सरकार के आदेश पर सर्वे हुआ था और उस दौरान उसका प्रकाशन वर्ष 1989 में कराया था। उस समय भदोही वाराणसी जिले का हिस्सा हुआ करता था। ज्ञानपुर तहसील मात्र ही जिले में थी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के पास जो भी आंकड़े उपलब्ध हैं सब उसी दौर के हैं। जनपद सृजन के बाद से लेकर अब तक सर्वे कार्य नहीं कराया गया है। अगर शासन का आदेश मिला तो पुन: सर्वे कराया जाएगा। शासन की मांग पर वक्फ बोर्ड संपत्तियों की सूची भेजी जा चुकी है।

उधर, संभावित विरोध को लेकर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के आदेश पर भदोही, गोपीगंज, रोटहां, नई बाजार, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, ज्ञानपुर समेत पूरे जिले में घनी आबादी वाले इलाकों में संसद में बिल पेश होने के साथ गुरुवार को दूसरे दिन भी पूरी चौकसी बरती जा रही है। बिल को लेकर जिले में कहीं से भी किसी तरह के विरोध का मामला सामने नहीं आया है बावजूद इसके बिल को लेकर मुस्लिम समाज के प्रबुद्धजनों एवं धर्म गुरुओं से प्रशासन सतत संपर्क में है।

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