पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के काला कोट पहनकर वकील के अवतार में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचने के बाद नया विवाद शुरू हो गया है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत पहुंचीं.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ममता बनर्जी अपना चुनाव हार चुकी हैं, इसलिए अब वह विधानसभा में आवाज नहीं उठा सकतीं. उन्हें ऐसी जगह चाहिए थी जहां वह अपनी बात रख सकें और मीडिया की सुर्खियों में बनी रहें, इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट को चुना. एक दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ममता बनर्जी ने हद कर दी है.

जब ममता बनर्जी कल वकील की पोशाक में कोर्ट पहुंचीं तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी इस पर आपत्ति जताई. बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है. बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है. इसमें ममता बनर्जी के वकालत पंजीकरण, लाइसेंस और पेशेवर स्थिति की जानकारी मांगी गई है.

ममता बनर्जी के खिलाफ BCI ने किए सवाल
बीसीआई ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी संवैधानिक पद पर होता है या सरकारी जिम्मेदारी निभा रहा होता है तो उसे अपने बार लाइसेंस को सेवा के दौरान निलंबित करवाना पड़ता है. बाद में दोबारा वकालत करने के लिए लाइसेंस को फिर से सक्रिय कराना होता है. पत्र में कहा गया है कि ममता बनर्जी 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं, इसलिए उनके वकालत पंजीकरण और लाइसेंस की स्थिति को रिकॉर्ड के आधार पर जांचना जरूरी है. बीसीआई ने यह भी पूछा है कि ममता बनर्जी का पंजीकरण नंबर क्या है और राज्य बार काउंसिल में उनका नामांकन कब हुआ था.

कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी
गुरुवार को ममता बनर्जी वकीलों की तरह गाउन और बैंड पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची थीं. इस दौरान उन्होंने चीफ जस्टिस के सामने चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों का मुद्दा उठाया. अदालत में उन्होंने कहा कि बंगाल कोई बुलडोजर राज्य नहीं है. जब वह अदालत से बाहर निकलीं तो कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की.

कोर्ट में कुछ याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने जाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों ने टीएमसी कार्यालयों में तोड़फोड़ की और टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी हुई. एक याचिका में आरोप लगाया गया कि सेंट्रल बंगाल की होग्गा मार्केट के पास तोड़फोड़ की गई और बुलडोजर की कार्रवाई भी हुई है.

यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और सांसद कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे.

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह पूरा मामला टीएमसी की तरफ से दाखिल एक जनहित याचिका से जुड़ा है. यह याचिका वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की गई.

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