भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए आजकल ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ (Energy Drinks) का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग इसे थकान मिटाने और तुरंत ऊर्जा पाने का जरिया मानते हैं लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोधों ने इसे एक मीठा जहर करार दिया है। विशेषज्ञों का दावा है कि ये ड्रिंक्स आपकी किडनी, लिवर और दिल को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं।
रिसर्च का चौंकाने वाला सच
साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा 2008 से 2020 के बीच की गई कई रिसर्च के रिव्यू में सामने आया है कि एनर्जी ड्रिंक्स शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। इनमें मौजूद कैफीन और शुगर का कॉम्बिनेशन किडनी में सूजन (Inflammation) पैदा करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई मामलों में ये ड्रिंक्स शराब और सोडा से भी अधिक घातक हैं क्योंकि ये शरीर को एक साथ डिहाइड्रेट भी करते हैं और शुगर लोड भी बढ़ाते हैं।
क्या है इसके अंदर का खतरनाक खेल?
एनर्जी ड्रिंक्स में हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप, टॉरिन, आर्टिफिशियल स्वीटनर और सोडियम बेंजोएट जैसे केमिकल्स होते हैं।
- धोखे की एनर्जी: डॉ. विमल कुमार राय (पटना) के अनुसार ये ड्रिंक्स असली एनर्जी नहीं देते बल्कि दिमाग में थकान के सिग्नल को दबा देते हैं। शरीर थका रहता है पर दिमाग को पता नहीं चलता।
- यूरिक एसिड का बढ़ना: हाई-फ्रक्टोज शुगर यूरिक एसिड को तेजी से बढ़ाती है जो किडनी में स्टोन और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनती है।
- माइक्रो इंजरी: बार-बार इन केमिकल्स को फिल्टर करने से किडनी की सेल्स में ‘माइक्रो इंजरी’ होती है जो बाद में क्रॉनिक किडनी डिजीज में बदल सकती है

खतरे के संकेत और लक्षण
शुरुआत में एनर्जी ड्रिंक्स के नुकसान दिखाई नहीं देते लेकिन धीरे-धीरे ये शरीर को इन समस्याओं की ओर धकेलते हैं:
- अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ना।
- हार्मोनल असंतुलन और इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) का कमजोर होना।
- मोटापा और फैटी लिवर की समस्या।
- रात में नींद न आना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन
- बचाव: नेचुरल एनर्जी अपनाएं
अगर आप इन ड्रिंक्स के आदी हैं तो आज ही इसे छोड़ें और स्वस्थ विकल्प चुनें:
- प्राकृतिक विकल्प: नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ या ताजे फलों का जूस पिएं।
- डाइट: अंकुरित अनाज (Sprouts) और ड्राई फ्रूट्स खाएं।
- पानी: दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
- जांच: अगर आप लंबे समय से इन ड्रिंक्स का सेवन कर रहे हैं तो एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और बीपी की जांच जरूर कराएं।
