उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश में संचालित फ्री बिजली योजना की अनिवार्य शर्तों को सरल बनाने की मांग दोहराते हुए विधानसभा में ऊर्जा मंत्री के बयान का स्वागत किया है। परिषद ने दो दिन पूर्व ही महत्वपूर्ण आंकड़े जारी कर कहा था कि करीब पांच लाख से अधिक किसान अब भी योजना से वंचित हैं।

परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा दिया गया बयान अत्यंत सराहनीय है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन किसानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनसे बिजली बिल की मांग नहीं की जा रही है और उनसे शीघ्र पंजीकरण कराने की अपील की गई है। परिषद ने इसे किसानों के हित में सकारात्मक पहल बताया। उल्लेखनीय है कि एक अप्रैल 2023 से प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों में निजी नलकूप (कृषि) उपभोक्ताओं को 140 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिमाह नि:शुल्क बिजली देने का निर्णय लागू है। योजना का लाभ लेने के लिए 31 मार्च 2023 तक के बकाया बिलों का भुगतान और मीटर स्थापना अनिवार्य शर्त रखी गई थी।

31 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में निजी नलकूपों के लगभग 15.64 लाख विद्युत कनेक्शन हैं, जिनमें से केवल 10.58 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। परिषद के मुताबिक करीब 5.10 लाख किसान अब भी योजना से बाहर हैं। परिषद ने बकाया भुगतान में व्यावहारिक राहत, मीटर स्थापना प्रक्रिया को सरल बनाने और ग्राम स्तर पर पंजीकरण शिविर लगाने की मांग दोहराते हुए कहा कि किसानों के हित में वह संघर्ष जारी रखेगी।

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