उत्तर प्रदेश में शहरी विकास, निवेश और स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों में बड़ा संशोधन किया है। इससे राज्य में छोटे और मध्यम निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा और शहरीकरण की प्रक्रिया को गति मिलेगी। नई नियमावली के तहत अब प्रदेश में केवल 3000 वर्ग मीटर भूमि पर अस्पताल और नर्सिंग होम खोले जा सकेंगे। पहले इसके लिए 20,000 वर्ग मीटर भूमि की अनिवार्यता थी। यह फैसला प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बल देगा।

व्यावसायिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

  • नई भवन निर्माण उपविधियों में ग्रीन बेल्ट को छोड़कर किसी भी प्रकार की भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति दी गई है। इसके तहत अब:
  • 3000 वर्ग मीटर भूमि पर अस्पताल/नर्सिंग होम का नक्शा पास होगा।
  • मेडिकल दुकानों के लिए भूमि की अनिवार्यता 300 वर्ग मीटर से घटाकर 100 वर्ग मीटर कर दी गई है।
  • हॉस्पिटल निर्माण हेतु सड़क की चौड़ाई 18 मीटर से घटाकर 12 मीटर कर दी गई है।
  • इन सुधारों से छोटे शहरों और कस्बों में भी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को बल मिलेगा। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है।

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