पश्चिम बंगाल के मालदा शहर में नौकरी गंवाने वाले योग्य शिक्षकों ने शुक्रवार को पोस्ट ऑफिस चौराहे पर भूख हड़ताल शुरू की। शिक्षकों ने एक अस्थायी मंच बनाकर 12 घंटे के इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की, जो सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक चलेगा।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी बहाली हो और पुलिस लाठीचार्ज और हिंसा का विरोध किया जाए।

प्रदर्शन में मालदा के इंग्लिश बाजार और आसपास के दूरदराज के इलाकों से सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने और शिक्षक समाज पर अत्याचार करने की साजिश हो रही है। वे इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

प्रदर्शन कर रहीं देवप्रिया चट्टोपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हमारा यह 12 घंटे का अनशन शिक्षक समाज पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। हमारी मांग है कि योग्य शिक्षकों को उनकी नौकरी वापस दी जाए। हमने पूरे मालदा जिले के शिक्षक समुदाय को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।”

शिक्षकों का कहना है कि उनकी नौकरी छीने जाने से उनके परिवारों का भविष्य खतरे में है। इसके अलावा, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और हिंसक कार्रवाई ने उनके आक्रोश को और बढ़ा दिया है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनकी बात सुनी जाए और बिना देरी के उनकी नौकरी बहाल की जाए।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने नारे लगाए और बैनर-पोस्टर के माध्यम से अपनी मांगों को सामने रखा। स्थानीय लोगों ने भी शिक्षकों के इस आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

शिक्षकों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और योग्य शिक्षकों को न्याय मिलेगा।

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