आर्थिक दबाव में फंसे मालदीव को भारत ने मुश्किल वक्त में सहारा दिया और अब मालदीव ने भारत से जुड़े 50 मिलियन यानी करीब $5 करोड़ के एक ट्रेजरी बिल का भुगतान कर दिया। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू ने जानकारी दी कि उनकी सरकार ने भारत से जुड़े इस ट्रेजरी बिल का भुगतान किया। यह वही आर्थिक सहायता थी जो भारत ने मालदीव को वित्तीय संकट से उबारने के लिए दी थी। दरअसल साल 2019 में मालदीव की तत्कालीन सरकार ने बजट घाटे को पूरा करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई के जरिए 50 मिलियन के ट्रेजरी बिल जारी किए थे। उस समय मालदीव की आर्थिक स्थिति दबाव में थी और भारत ने आगे बढ़कर मदद पहुंचाई। ट्रेजरी बिल यानी टी बिल सरकारों द्वारा अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए जारी किए जाने वाले कर्ज साधन होते हैं।

भारत ने सिर्फ यह मदद ही नहीं दी बल्कि कई बार भुगतान की समय सीमा बढ़ाकर भी मालदीव को राहत पहुंचाई। राष्ट्रपति मोजूक के मुताबिक उनकी सरकार जनवरी 2024 में एक 50 मिलियन का डे बिल चुका चुकी है और अब दूसरा भुगतान भी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक और टी बिल सितंबर में चुकाया जाना बाकी। मुजू ने दावा किया कि उनकी सरकार ने पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए बड़े कर्ज बोझ को कम करने की दिशा में यह कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से मालदीव को 150 मिलियन डॉलर के संभावित कर्ज दबाव से राहत मिली। भारत और मालदीव के रिश्तों में आर्थिक सहयोग हमेशा अहम रहा है। जब भी मालदीव पर आर्थिक संकट आया है, भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया।

कोविड महामारी के दौरान भी भारत ने दवाइयां, जरूरी सामान और आर्थिक सहायता के जरिए मालदीव की मदद की थी। भारत ने 2019 से कई बार मालदीव के ट्रेजरी बिल रोलओवर किए। यानी भुगतान की अवधि बढ़ाकर मालदीव को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत दी। कई मामलों में यह राहत बिना ब्याज के भी दी गई ताकि मालदीव की विदेशी मुद्रा स्थिति पर असर कम पड़े। पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि भारत सिर्फ पड़ोसी नहीं बल्कि भरोसेमंद दोस्त की भूमिका भी निभाता है। और तो और भारत ने उस वक्त पर भी मालदीव की मदद की जब मालदीव की मुईजू सरकार भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रही थी। भारत ने एक तरह से मालदीव का साथ कभी भी नहीं छोड़ा। राजनीतिक बयानबाजी अलग हो सकती है लेकिन संकट के समय भारत हमेशा अपने मित्र देशों के साथ खड़ा नजर आता है।

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