मथुरा के विश्वविख्यात बांके बिहारी मंदिर का खजाना शुक्रवार को 54 साल बाद खोला गया. हाई पावर कमेटी के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर के सेवायत गोस्वामी दोनों मौजूद रहे. जैसे ही मंदिर के खजाने के खुलने की खबर फैली, परिसर में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

कमरे में क्या-क्या मिला ?

करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई में अधिकारियों ने खजाने के कमरे की सील तोड़ी और भीतर रखी वस्तुओं की जांच की.  खजाने में कुछ चांदी के बर्तन और पात्र मिले हैं, हालांकि किसी बड़े स्वर्ण आभूषण या मूल्यवान वस्तु की बरामदगी नहीं हुई. इस दौरान कमरे से दो सर्प के बच्चे भी निकले, जिन्हें वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रूप से पकड़ लिया. अब इसको लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है.

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भाजपा सरकार से करबद्ध आग्रह…कम-से-कम मंदिरों के ख़ज़ाने तो छोड़ दें…इतना भी लालच अच्छा नहीं 
दुर्भाग्यपूर्ण!.

वहीं खजाने को लेकर सर्किल ऑफिसर (सीओ) सदर संदीप कुमार ने बताया, ‘हाई पावर कमेटी के निर्देश पर बांके बिहारी मंदिर का खजाना खोला गया, तीन घंटे तक चली कार्रवाई में कुछ चांदी के बर्तन मिले हैं. जांच पूरी होने के बाद खजाने को फिर से सील कर दिया गया है.’

मंदिर के सेवादारों ने जताई नाराजगी

मंदिर के कई सेवायत गोस्वामियों ने इस कार्रवाई पर नाराज़गी जताई. उनका कहना है कि यह खजाना मंदिर की परंपरा, आस्था और सालों की धार्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है. इसे इस तरह प्रशासनिक आदेशों पर खोलना न केवल अनुचित है बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला है.

कार्रवाई के दौरान कुछ सेवायतों ने हाई पावर कमेटी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की. उनका कहना है कि यह कदम धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है.

तीन घंटे की प्रक्रिया के बाद खजाने को दोबारा सील कर दिया गया. अब हाई पावर कमेटी की अगली बैठक में यह तय किया जाएगा कि आगे कब और किन परिस्थितियों में खजाने की अगली परत खोली जाएगी.

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