पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने शांति और मध्यस्था का ढोंग लेकिन पर्दे के पीछे वही पुराना डबल की और पाकिस्तान की इसी दोहरी चाल पर अब अमेरिका में भी सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप के बेहद करीबी और रिपब्लिकन सेनेटर प्रिंसे ग्राहम ने पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई है जिसे वो कभी नहीं भूल पाएगा। दरअसल अमेरिकी संसद में हुई एक सुनवाई के दौरान ग्राहम ने सीधे सवाल किया अगर पाकिस्तान सच में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का निष्पक्ष मध्यस्थ है तो फिर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह क्यों दे रहा है? दरअसल रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ट्रंप द्वारा सीज फायर की घोषणा के बाद ईरान के कुछ सैन्य विमान पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर उतारे गए थे। इनमें एक RC130 विमान भी शामिल बताया गया जो जासूसी और निगरानी मिशन के लिए इस्तेमाल होता है। ग्राहम ने अमेरिकी रक्षा अधिकारियों से पूछा कि क्या उन्हें इन रिपोर्ट्स की जानकारी है? जिसका जवाब मिला कि एक रिपोर्ट देखी है। लेकिन जैसे ही ग्राहम ने पूछा कि क्या यह सच है?

अगर सच है तो क्या पाकिस्तान को निष्पक्ष मध्यस्थ माना जा सकता है? तो वहां बैठे अधिकारी गोलमोल जवाब देने लगे। यही बात ग्राहम को और भड़का गए। गुस्से में ग्राहम ने साफ कहा कि मैं पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता हूं। यानी अमेरिका के बड़े नेताओं के बीच भी अब पाकिस्तान की साख लगभग खत्म होती दिखाई दे रही। इब्राहिम ने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान वाकई ईरानी सैन्य विमानों को अपनी जमीन पर छिपा रहा तो अमेरिका को तुरंत किसी और मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब समझ आता है कि यह पूरी बातचीत आगे क्यों नहीं बढ़ रही। देखिए उन्होंने क्या कुछ कहा। पाकिस्तान पाकिस्तान पार्कियन एयरक्राफ्ट? असल में यह चौंकाने वाला इसलिए भी नहीं है क्योंकि पाकिस्तान का असली चेहरा यही है। एक तरफ दुनिया के सामने शांति का संदेश देना। वहीं दूसरी तरफ आतंकियों और अपने खास साथियों को पर्दे के पीछे मदद करना। कभी अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद लेना, कभी चीन के इशारों पर चलना और अब ईरान के साथ खड़े होने का  खेल खेल रहा है।

यह दोहरा खेल पाकिस्तान हमेशा से खेलते आया। हालांकि पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी विमानों की मौजूदगी सिर्फ राजनयिक और लॉजिस्टिक सहयोग का हिस्सा थी। लेकिन सवाल यही है कि अगर सब कुछ सामान्य था तो फिर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं? दरअसल दुनिया अब पाकिस्तान की चाल समझ चुकी है। आतंकवाद के मुद्दे पर पहले ही उसकी छवि खराब थी और अब अमेरिका के भीतर भी उसकी डबल गेम पॉलिसी पर खुलकर सवाल उठ रहे हैं।

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