बांकेबिहारी कॉरिडोर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा ट्रस्ट बनाए जाने की घोषणा और कॉरिडोर निर्माण की अधिसूचना जारी होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर के गोस्वामी इसे अपनी निजी संपत्ति बता रहे हैं और सरकार से इसमें हस्तक्षेप न करने की मांग कर रहे हैं।

वहीं प्रशासन लगातार गोस्वामियों को समझाने का प्रयास कर रहा है। इस बीच प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों की जांच शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांकेबिहारी मंदिर जिस स्थान पर स्थित है, वह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में गोविंद देव के नाम दर्ज है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एस.बी. सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है।

जानकारी के अनुसार, मौजा वृंदावन बांगर के राजस्व अभिलेख/खतौनी में श्री बांकेबिहारी मन्दिर के नाम से कोई भूमि अंकित नहीं है। बल्कि वृंदावन बॉगर के नॉन जेडए की खेवट मुहाल कलॉ गोविन्द देव जी खेवट संख्या 103, खसरा संख्या 598, क्षेत्रफल 299.65 एकड़ है।

निगम के गृह-जलकर में बांकेबिहारी का नाम

हालांकि, नगर निगम में गृह कर और जलकर बांके बिहारी मंदिर के नाम है। कर अधीक्षक नगर निगम मथुरा-वृंदावन द्वारा नगर आयुक्त को 10 अगस्त 2022 को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम के गृहकर/जलकर अभिलेखों में भवन संख्या 170-170/7 बिहारीपुरा वृंदावन में स्वामित्व के स्तम्भ में ठाकुर बिहारी जी महाराज का नाम अंकित चला आ रहा है। विद्युत विभाग के बिल में कनेक्शन संख्या 9009104000 बॉकेबिहारी मन्दिर के नाम से दर्ज चला आ रहा है।

पूर्वजों की है मंदिर की पूरी जमीन: गोस्वामी

दूसरी ओर, प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी और आचार्य दिनेश गोस्वामी का कहना है कि बांके बिहारी मंदिर की संपूर्ण भूमि उनके पूर्वजों को भरतपुर के राजा रतन सिंह के वंशजों द्वारा दान में दी गई थी। तब से लेकर आज तक उस भूमि के मालिक ठाकुर बांके बिहारी महाराज हैं। इसी भूमि पर बिहारी जी मंदिर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि बांके बिहारी मंदिर के साथ बिहारीपुरा क्षेत्र तक की पूरी भूमि मंदिर निर्माण के लिए दी गई थी।

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