समाजवादी पार्टी के घोसी से विधायक सुधाकर सिंह को कोर्ट ने फरार घोषित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद वे अपने क्षेत्र में खुले तौर पर सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। यह मामला साल 1986 का है, जब उन्होंने बिजली उपकेंद्र पर प्रदर्शन के दौरान हंगामा और तोड़फोड़ की थी।

क्या है पूरा मामला?
साल 1986 में मऊ जिले के दोहरीघाट क्षेत्र में स्थित एक 400 केवी विद्युत उपकेंद्र पर प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान भीड़ ने बवाल किया, तोड़फोड़ की और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। इस मामले में दोहरीघाट पुलिस ने सुधाकर सिंह समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया। इन पर शासकीय कार्य में बाधा, तोड़फोड़ और अधिकारियों से दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगे। उस समय मऊ जिला नहीं बना था, इसलिए मामला आजमगढ़ न्यायालय में चला। बाद में मऊ जिले के गठन के बाद केस की फाइल मऊ कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई।

कोर्ट ने क्यों घोषित किया फरार?
25 जुलाई 2023 को एमपी-एमएलए कोर्ट मऊ ने सुधाकर सिंह को फरार घोषित कर दिया। कोर्ट का कहना था कि वह कई बार बुलाने पर भी पेश नहीं हुए, न ही समन या वारंट की तामील हुई। हालांकि, 4 जून 2024 को विधायक ने जिला जज के सामने एक निगरानी याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी और कहा कि उन्हें कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी।

फिर भी कर रहे राजनीति
फरार घोषित होने के बावजूद सुधाकर सिंह लगातार अपने क्षेत्र में दिखते रहे और सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। इससे आम जनता और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

अब क्या होगा?
सुधाकर सिंह के विधायक चुने जाने के बाद मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में चला गया। उनके वकील वीरेंद्र बहादुर पाल ने तर्क दिया कि समन और वारंट उन्हें कभी नहीं मिले और कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी। वहीं शासकीय अधिवक्ता अजय सिंह ने बताया कि विधायक को इस मामले की पूरी जानकारी थी। उन्होंने कोर्ट के आदेश पर 2000 रुपए का जुर्माना भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में जमा किया है। कोर्ट ने फिलहाल सुधाकर सिंह को फरार घोषित करने के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन उनकी निगरानी याचिका पर अब 10 जुलाई 2025 को सुनवाई होगी।

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