पेस्टिसाइड्स यानी कीटनाशक को लेकर एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई। इंटरनेशनल रिसर्च ने इनके लंबे समय तक संपर्क को लेकर गंभीर चिंता जताई है। स्टडी के मुताबिक, जिन इलाकों में पेस्टिसाइड्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है वहां रहने वाले लोगों में कई प्रकार के कैंसर का खतरा 150 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

बता दें कि एक नई स्टडी, जो जर्नल Nature Health में प्रकाशित हुई है ने यह संकेत दिया है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों (Pesticides) के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इस रिसर्च को फ्रांस के IRD, Institut Pasteur, University of Toulouse और पेरू के National Institute of Neoplastic Diseases (INEN) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है।

इस स्टडी में साइंटिस्टों ने पर्यावरण निगरानी डेटा, राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्रियों और जैविक (Biological) रिसर्च को एक साथ जोड़कर यह समझने की कोशिश की कि कीटनाशकों का असर मानव स्वास्थ्य पर कैसे पड़ता है। पहले के Research ज्यादातर एक-एक केमिकल पर प्रयोगशाला में किए जाते थे, लेकिन यह स्टडी असल जीवन में होने वाले Mixed एक्सपोजर पर आधारित है, जहां लोग एक साथ कई कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं।

पेरू को इस रिसर्च के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि वहां कृषि का बड़े पैमाने पर विस्तार है और अलग-अलग इलाकों में पर्यावरण और सामाजिक असमानताएं भी बहुत ज्यादा हैं। कुछ ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में कीटनाशकों का स्तर काफी अधिक पाया गया, जहां लोग औसतन एक साथ लगभग 12 अलग-अलग कीटनाशकों के संपर्क में रहते हैं।

शोधकर्ताओं ने 2014 से 2019 तक के डेटा का इस्तेमाल करके पूरे देश में कीटनाशकों के फैलाव का नक्शा तैयार किया। इसके बाद इसे 2007 से 2020 के बीच 1.5 लाख से ज्यादा कैंसर मरीजों के स्वास्थ्य डेटा से मिलाया गया। परिणामों में पाया गया कि जिन इलाकों में कीटनाशकों का स्तर ज्यादा था, वहां कुछ प्रकार के कैंसर के मामले भी अधिक थे। इन क्षेत्रों में कैंसर का जोखिम औसतन 150 प्रतिशत तक अधिक पाया गया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पहली बार है जब National level पर यह स्पष्ट संबंध देखा गया है कि पर्यावरण में मौजूद कीटनाशक शरीर में ऐसे बदलाव पैदा कर सकते हैं जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं। Institut Pasteur के शोधकर्ताओं के अनुसार ये केमिकल्स शरीर की कोशिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली को धीरे-धीरे प्रभावित करते हैं, और यह असर लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है।

लिवर को इस रिसर्च में खास तौर पर महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह शरीर में आने वाले केमिकल्स को प्रोसेस करता है। स्टडी में यह भी पाया गया कि कीटनाशक शरीर की कोशिकाओं की पहचान और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वे अन्य बीमारियों और बाहरी तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। यह शोध मौजूदा सुरक्षा नियमों पर भी सवाल उठाता है, क्योंकि अभी तक ज्यादातर नीतियां एक-एक केमिकल की सुरक्षित सीमा तय करके बनाई जाती हैं, जबकि वास्तविक जीवन में लोग कई केमिकल्स के मिश्रण के संपर्क में रहते हैं।

वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि जलवायु घटनाएं जैसे El Nino भी कीटनाशकों के फैलाव और उपयोग को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे जोखिम और बढ़ सकता है। हालांकि यह अध्ययन पेरू पर केंद्रित है, लेकिन इसके निष्कर्ष पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जहां कृषि और पर्यावरणीय जोखिम अधिक हैं। शोधकर्ता अब इस विषय पर और गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि कैंसर के जोखिम को कम करने और बेहतर स्वास्थ्य नीतियां बनाने में मदद मिल सके।

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