उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक ऐसी हृदय विदारक घटना हुई जिसने सिर्फ एक परिवार ही नही पूरे मोहल्ले को गमगीन कर दिया। यहां के जहांगीराबाद नगर के मोहल्ला जटियान में एक ही घर से एक साथ दो अर्थियां उठीं। पहले पिता, फिर कुछ ही घंटों बाद बेटा, वही बेटा जो अपने पिता की मौत का ग़म भी पूरा महसूस नहीं कर पाया, और दुनिया छोड़कर चला गया।

दअरअसल, राजेंद्र प्रजापति एक साधारण मजदूर थे जो पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। शनिवार शाम क़रीब छह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। घर में रोना-धोना शुरू हुआ। लेकिन परिवार ने ये ख़बर उनके बेटे पंकज को बताने की हिम्मत नहीं जुटाई क्योंकि पंकज खुद ठीक नहीं था। कुछ वर्ष पहले हुए एक्सीडेंट के बाद उसका शरीर अक्सर साथ नहीं देता था। इसी बीच रात बढ़ती गई और जैसे ही पंकज को पिता की मौत की जानकारी दी गई मानो उसकी सांसों ने भी जवाब दे दिया। सदमे में डूबा पंकज अचानक गिर पड़ा,,, परिवार उसे अस्पताल लेकर भागा लेकिन डॉक्टर ने एक ही लाइन में सब कुछ ख़तम कर दिया पंकज अब इस दुनिया में नहीं रहा।

पिता और पुत्र दोनों चले गए घर में चीखें थीं, आंखों में आंसू थे लेकिन सबसे दर्दनाक नज़ारा था, वो छोटा बच्चा सिर्फ दो साल का मासूस जो समझ भी नहीं पा रहा था कि दादा और पिता अचानक कहां चले गए इसी घर में एक गर्भवती मां भी है जिसके बच्चे की किस्मत में जन्म से पहले ही पिता का साया छिन चुका है। रविवार की सुबह जब दो अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरे मोहल्ले में सिर्फ सन्नाटा था मां की चीखें, पत्नी की बेबसी, बच्चों का भविष्य। हर किसी की आंखें नम कर रहा था। गंगा घाट पर जब दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ हुआ लोगों ने कहा कि इतना बड़ा दर्द, शायद ही किसी ने देखा होगा।

कहते हैं, मां-बाप का जाना तकलीफ़ देता है लेकिन बेटे का जाना, पिता की चिता को भी ठंडा कर देता है यहां तो दोनों एक साथ चले गए जैसे पिता ने बेटे को पुकारा और बेटा बिना देर किए चल पड़ा। अब एक ही घर में दो मौतें दो अर्थियां एक अनाथ बच्चा…और एक गर्भवती पत्नी,,, ये सिर्फ एक खबर नहीं, एक ऐसा जख्म है जो सुनने वालों की रूह तक को हिला देता है।

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