उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने राजधानी लखनऊ में एक अवैध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। यह इंजेक्शन दूध निकालने और सब्जियों-फलों को जल्दी बड़ा करने के लिए अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था। STF ने कार्रवाई के दौरान 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है और करीब 2 करोड़ रुपए की प्रतिबंधित दवाएं और अन्य सामान जब्त किया है।

कहां मिली फैक्ट्री और क्या-क्या मिला?
STF को सूचना मिली थी कि पारा थाना क्षेत्र के मुजफ्फर खेड़ा इलाके में एक सरकारी स्कूल के पास एक अवैध फैक्ट्री चलाई जा रही है। इस पर पुलिस ने सोमवार देर रात छापेमारी की। छापे के दौरान पुलिस ने जो सामान जब्त किया, उसमें शामिल हैं 20 गैलन (प्रत्येक 5 लीटर) ऑक्सीटोसिन, 39 बोरी इंजेक्शन (बड़ी मात्रा में), पैकिंग मशीन, खाली शीशियां और ढक्कन, मोबाइल फोन, नकदी और एक वाहन (कार-डाला) बरामद किया।

कैसे चल रहा था ये गोरखधंधा?
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ये लोग बिहार से मिनरल वाटर के नाम पर ऑक्सीटोसिन के ड्रम मंगवाते थे, फिर उसे लखनऊ और आसपास के जिलों में बेचते थे। इसका इस्तेमाल दूध निकालने के लिए पशुओं में, सब्जियों और फलों को जल्दी बड़ा करने के लिए किया जा रहा था।

सरकार की सख्त पाबंदी
गौरतलब है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर भारत सरकार ने 2001 से सख्त प्रतिबंध लगा रखा है। नियमों के अनुसार यह इंजेक्शन केवल ब्लिस्टर पैक (सीलबंद पैक) में ही बेचा जा सकता है, लेकिन यह गिरोह इसे खुली बोतलों में पैक करके अवैध रूप से सप्लाई कर रहा था।

अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा
पुलिस का कहना है कि यह रैकेट सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। जब्त किए गए इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।

आगे की कार्रवाई
STF अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पारा थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

जनता की सेहत पर बड़ा खतरा टला
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से लोगों की सेहत और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ चल रहे एक बड़े खतरे को रोका गया है। प्रशासन इस तरह की अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए है।

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