सोने-चांदी की कीमतों में इस साल जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, जिससे आम आदमी की खरीदारी मुश्किल होती जा रही है। दिसंबर 2024 में 76,162 रुपये प्रति 10 ग्राम बिकने वाला सोना अब 1,21,525 रुपये के पार पहुंच चुका है। वहीं, चांदी भी 1,64,500 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर को छू चुकी है। तेजी के इस दौर के बीच जानकारों ने जल्द ही सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट की संभावना जताई है, जिससे निवेशकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है और यह 1,64,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू चुकी है। इस तेज़ी ने त्योहारों के मौसम में आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। धनतेरस और दिवाली जैसे पर्वों पर सोने की खरीद आम परंपरा मानी जाती है, लेकिन मौजूदा दामों पर यह आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।

सोने की कीमतों में उछाल के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उछाल के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी वजह जियोपॉलिटिकल टेंशन है। मिडिल ईस्ट में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण सोने की मांग बढ़ रही है। निवेशक अस्थिर हालातों में सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने को चुन रहे हैं।

इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की खरीद कर रहे हैं, जिससे कीमतों में और इज़ाफा हो रहा है। त्योहारी मांग (फेस्टिव डिमांड) और मजबूत खरीदारी रुझान ने भी सोने की कीमतों को ऊपर धकेलने में भूमिका निभाई है।

जल्द आ सकती है बड़ी गिरावट
हालांकि, जानकारों का मानना है कि अब सोने-चांदी की कीमतें अपने उच्चतम स्तर को छू चुकी हैं और यहां से गिरावट का दौर शुरू हो सकता है।
PACE 360 के फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल के मुताबिक, “सोने की मौजूदा तेजी टिकाऊ नहीं है। गोल्ड और सिल्वर दोनों ही अपनी वास्तविक वैल्यू से काफी ऊपर जा चुके हैं। अब बाजार में करेक्शन यानी सुधार की संभावना बन रही है।” उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति पहले भी 2011, 2020 और 2022 में देखी जा चुकी है, जब सोना अपने उच्च स्तर से अचानक नीचे गिरा था। मुनाफा कमाने की होड़ में निवेशक प्रॉफिट बुक करते हैं, जिससे सोने की कीमत में गिरावट आने लगती है।

गोल्ड में आ सकता है 30-45% तक की गिरावट
अमित गोयल का अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सोने की कीमत में 30-35% तक की गिरावट आ सकती है। यदि 2008 और 2011 जैसी स्थितियां बनती हैं, तो यह गिरावट 45% तक भी जा सकती है। ऐसे में सोना 1,22,000 रुपये के उच्चतम स्तर से गिरकर ₹77,700 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है
अगर इजराइल-हमास युद्ध पर सीजफायर होता है और मिडिल ईस्ट में स्थिरता लौटती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है। साथ ही, अमेरिका में चल रही गवर्नमेंट शटडाउन की स्थिति यदि नए फंडिंग बिल के पास होने से खत्म होती है, तो भी सोने की कीमत में गिरावट आ सकती है। इतिहास बताता है कि जब अमेरिका में 2013 और 2019 में शटडाउन समाप्त हुए थे, तो सोने की कीमत में 2–3% की गिरावट आई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में संभावित गिरावट के चलते निवेशकों को दोबारा सस्ते दामों पर निवेश का मौका मिल सकता है। ऐसे में जिन लोगों ने ऊंचे दामों पर खरीदारी नहीं की है, उन्हें आने वाले महीनों में सटीक समय पर निवेश करने का फायदा मिल सकता है।

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