मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सिर्फ राजनीति या युद्ध तक सीमित नहीं है बल्कि यह सीधे इंसानियत से जुड़ी है। एक ऐसा विमान, जो दवाइयाँ और राहत सामग्री लाने की तैयारी कर रहा था, अब खुद मदद का मोहताज बन गया है। ईरान के मशहद एयरपोर्ट पर खड़ा एक यात्री विमान जो कुछ ही दिनों में भारत आने वाला था अचानक अमेरिकी हमले की चपेट में आ गया। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह नुकसान एक अमेरिकी एयरस्ट्राइक के दौरान हुआ।

यह विमान “माहन एयर” का था और इसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी। प्लान सीधा था कि दिल्ली आना, दवाइयाँ और जरूरी मेडिकल सामान लेना, और फिर उन लोगों तक पहुंचाना जो इस युद्ध की मार झेल रहे हैं। लेकिन अब यह मिशन फिलहाल ठहर गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विमान 1 अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचने वाला था। यहां से उसे जरूरी मेडिकल सप्लाई लेकर वापस ईरान जाना था।

सोचिए, उस उड़ान में सिर्फ सामान नहीं होता वो उम्मीद होती जिसका हज़ारो लोग इंतज़ार कर रहे थे। अस्पतालों के लिए दवाइयाँ, घायल लोगों के लिए राहत सामग्री, और उन परिवारों के लिए थोड़ी राहत जो रोज़ अनिश्चितता में जी रहे हैं। लेकिन अब वही विमान रनवे पर ही खड़ा है- खामोश, क्षतिग्रस्त, और इंतजार में।

 

ईरान ने इस हमले का आरोप अमेरिका पर लगाया है, लेकिन अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। यही बात इस पूरे मामले को और भी ज्यादा मुश्किल बना देती है क्योंकि जब बात सैन्य टकराव से आगे बढ़कर मानवीय मदद तक पहुंच जाती है, तो हर कदम के मायने बदल जाते हैं।

माहन एयर कोई छोटी-मोटी एयरलाइन नहीं है। यह पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया तक अपनी सेवाएं देती है। इस तरह के समय में, जब कई रास्ते बंद हो जाते हैं, ऐसी ही उड़ानें मदद और राहत का जरिया बनती हैं। ऐसे में एक विमान का इस तरह क्षतिग्रस्त होना सिर्फ एक तकनीकी नुकसान नहीं, बल्कि राहत के पूरे नेटवर्क पर असर डाल सकता है।

 

इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जो उम्मीद जगाता है। भारत ने हाल ही में 18 मार्च को ईरान के लिए मेडिकल सप्लाई की अपनी पहली खेप भेजी थी। ईरान के दूतावास ने इसके लिए भारत और यहां के लोगों का दिल से धन्यवाद भी किया। यह सिर्फ सरकारों के बीच का रिश्ता नहीं है यह लोगों के बीच का जुड़ाव है।

और तो और इस पूरे घटनाक्रम में एक बेहद भावुक पहलू भी सामने आया। जम्मू-कश्मीर से कई लोगों ने ईरान के लिए फंड इकठ्ठा किया। कोई पैसे, कोई सामान, तो कोई अपनी सबसे कीमती चीज भी लेकर ईरान की मदद करने पहुंचा। एक महिला ने अपने दिवंगत पति की याद में संभालकर रखा सोना तक दान कर दिया, सिर्फ इसलिए कि किसी और का घर बच सके। यह बताता है कि जंग चाहे कहीं भी हो, उसका दर्द सीमाओं में नहीं बंधता।

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