उत्तरकाशी, 28 दिसंबर । चिन्यालीसौड़ स्थित मेला स्थल टिहरी बांध की झील में डूब जाने के बाद विगत वर्षों से प्रारंभ किए गए भुवनेश्वर मेले का आगाज रविवार को हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ भुवनेश्वरी देवी की डोली के सान्निध्य में भागीरथी घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं दर्जा धारी राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि मेले को और अधिक आकर्षक बनाया जाएगा।

मेला प्रमुख रणवीर सिंह महंत ने कहा कि मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं और इन्हें संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। मेले में झूले, चरखी, मौत का कुआं सहित मनोरंजन की विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं।

उल्लेखनीय है कि पहाड़ों में थौलू मेलों की अपनी एक अलग पहचान रही है। मान्यता है कि जब किसानों की फसलें लहलहाती थीं, तब बैसाख माह में लगने वाले एकदिवसीय मेलों में गांव की ध्याणियां एवं नाते-रिश्तेदार एक-दूसरे से मिलते थे। मेला शब्द का अर्थ ही ‘मिलन’ माना जाता है।

हालांकि, विकास की चकाचौंध में ऐतिहासिक देवी सौड़ मेला स्थल टिहरी बांध की झील में डूब जाने के कारण यहां पारंपरिक मेला आयोजित नहीं हो सका। इसके बाद भुवनेश्वर मंदिर समिति द्वारा इस परंपरा को जीवित रखने के लिए विगत कुछ वर्षों से शीतकालीन मेले का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर विजय भूषण नौटियाल, शुभाष नौटियाल, जयपाल तुल्याड़ी, उदयपाल सिंह परमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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