उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जिले के कोर्ट परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत खुशियों की अदालत साबित हुई। जहां कानूनी दांव-पेचों के बीच टूटते हुए रिश्तों को संजीवनी मिली। लोक अदालत में कुल 1,85,609 मामलों का निस्तारण हुआ, लेकिन सबसे खास रहे वो 31 दंपती, जिन्होंने सालों पुराने गिले-शिकवे मिटाकर फिर से एक साथ रहने का फैसला किया।

‘नहीं देती खाना, फोन में रहती है बिजी’
दिल्ली के एक युवक की शादी 2021 में गाजियाबाद की युवती से हुई थी। पति का आरोप था कि पत्नी उसे खाना नहीं देती और दिन भर फोन में व्यस्त रहती है। तकरार इतनी बढ़ी कि पत्नी मायके चली गई। काउंसलिंग के दौरान पत्नी ने अपनी गलती मानी और दोनों ने फिर से एक-दूजे का दामन थाम लिया।

MNC में बड़े पदों पर काम करने वाले दंपती ने फाड़ी तलाक की अर्जी
रामप्रस्था कॉलोनी की रहने वाली एक युवती की शादी 2011 में गुरुग्राम के युवक से हुई थी। दोनों बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में ऊंचे पदों पर हैं और उनकी दो बेटियां भी हैं। करियर और ईगो की लड़ाई में बात तलाक तक पहुंच गई थी। लेकिन लोक अदालत में बच्चों के भविष्य और पुराने प्यार को देखते हुए दोनों ने तलाक का विचार छोड़ दिया और साथ घर लौटे।

रंग के ताने और मर्जी के खिलाफ शादी, सब माफ!
लोनी की एक युवती की शादी 2009 में हुई थी, लेकिन पति उसे काले रंग का ताना देता था। पति का कहना था कि शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई। इस पर युवती का तर्क था कि पसंद नहीं थी तो शादी क्यों की? लंबी बहस और काउंसलिंग के बाद, पति ने अपनी गलती का अहसास किया और पत्नी के सम्मान के साथ उसे घर ले जाने को राजी हुआ।

दहेज का केस और 2 साल की जुदाई खत्म
30 जनवरी 2023 को दिल्ली के एक कारोबारी से शादी करने वाली गाजियाबाद की युवती छोटी-छोटी बातों पर विवाद के बाद मायके बैठ गई थी। मामला दहेज उत्पीड़न के केस तक पहुंच गया। लेकिन 2 साल बाद लोक अदालत में दोनों ने महसूस किया कि जिद से बेहतर साथ रहना है। युवती ने केस वापस लेने और पति के साथ रहने का वादा किया।

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