महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावना आंकड़ा सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) इतनी तेजी से पैर पसार रहा है कि हर 8 मिनट में एक महिला इसके कारण दम तोड़ रही है। पहले यह माना जाता था कि यह बीमारी केवल बड़ी उम्र की महिलाओं को होती है लेकिन अब 20-30 साल की युवतियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं।

क्या है इसका मुख्य कारण?

भंगेल सीएचसी की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक के अनुसार सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा विलेन एचपीवी (HPV – ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) है। यह वायरस मुख्य रूप से शारीरिक संबंध (सेक्स) के जरिए फैलता है। एचपीवी के लगभग 200 प्रकार हैं लेकिन टाइप 16 और 18 सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। लगभग 95 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामलों की जड़ लंबे समय तक रहने वाला एचपीवी इंफेक्शन ही होता है।

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किन महिलाओं को है सबसे ज्यादा खतरा?

डॉ. पाठक ने उन स्थितियों को स्पष्ट किया है जिनमें इस कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है:

  1. जल्दी सक्रियता: कम उम्र में शारीरिक संबंध बनाना या जल्दी प्यूबर्टी आना। और ये भी पढ़े
  2. जीवनशैली: धूम्रपान (स्मोकिंग), शराब का सेवन और लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों (Oral Contraceptive Pills) का इस्तेमाल।
  3. कमजोर इम्यूनिटी: एचआईवी (HIV) जैसी बीमारियां जो शरीर की लड़ने की शक्ति कम कर देती हैं।
  4. अन्य कारण: बार-बार गर्भधारण करना या मल्टीपल पार्टनर होना।

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शुरुआती लक्षण जिन्हें भूलकर भी न करें नजरअंदाज

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य समझकर छोड़ दिए जाते हैं जो आगे चलकर जानलेवा बनते हैं:

  • असामान्य ब्लीडिंग: पीरियड्स के बीच में खून आना, संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग या मेनोपॉज (पिरियड्स बंद होने) के बाद अचानक खून आना।
  • सफेद पानी: योनि से बदबूदार और पानी जैसा डिस्चार्ज होना।
  • एडवांस्ड लक्षण: तेजी से वजन कम होना, कमर या पीठ में लगातार दर्द, पेशाब में दिक्कत और कब्ज की समस्या।

बचाव और जांच: कैसे सुरक्षित रहें?

जागरूकता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा इलाज है। डॉक्टर दो मुख्य तरीके सुझाते हैं। यह वैक्सीन संक्रमण को कैंसर में बदलने से रोकती है। छोटी बच्चियों और युवा महिलाओं को यह टीका जरूर लगवाना चाहिए। यह एक साधारण स्क्रीनिंग टेस्ट है जिससे कैंसर होने से कई साल पहले ही गर्भाशय में हो रहे बदलावों का पता लगाया जा सकता है।

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इलाज के विकल्प

कैंसर का पता चलने के बाद डॉक्टर स्टेजिंग के आधार पर इलाज तय करते हैं:

  1. शुरुआती स्टेज: केवल सर्जरी (हिस्ट्रेक्टोमी) के जरिए कैंसर वाले हिस्से को हटा दिया जाता है।
  2. एडवांस्ड स्टेज: सर्जरी के साथ-साथ रेडिएशन या कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।

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