16-17 जुलाई को हथिनी कुंड से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था। यमुना का बढ़ता जलस्तर अब किसानों के खेतों में पहुंच गया है। करीब 300 से 400 बीघा क्षेत्र जलमग्न हो चुका है। इनमें से 200 बीघा में बाजरा, तिलहन, मूंग और उर्द की फसलें लगी थीं, जो पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। खाली खेतों में पानी भरने से आगामी आलू की फसल की बुवाई में देरी की आशंका है। प्रशासन से मदद न मिलने से किसान परेशान हैं। क्षेत्रीय लेखपाल दरब सिंह ने बताया कि वे रोजाना स्थिति की जांच कर रहे हैं और प्रभावित फसलों का आकलन किया जा रहा है। एसडीएम मनीष चौधरी के अनुसार प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। अब हथिनी कुंड से पानी छोड़ना बंद कर दिया गया है। उम्मीद है कि कुछ दिनों में जलस्तर कम होने लगेगा।

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