मुजफ्फरनगर/ बुढ़ानाप्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व डाक दिवस इस बार भारतीय डाक विभाग के लिए विशेष महत्व रखता है। डाकघर, बुढ़ाना, जनपद मुजफ्फरनगर में आज एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजीव कुमार एवं शिवराज सिंह ने किया। समारोह में डाक विभाग के कर्मचारियों को फूलमाला पहनाकर एवं उपहार भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विश्व डाक दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को डाक सेवाओं के महत्व और बदलते स्वरूप के बारे में जागरूक करना है। आज भारतीय डाक केवल पत्र और पार्सल पहुंचाने का साधन नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया और हरित भविष्य का वाहक बन चुका है।भारतीय डाक विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त करते हुए आईटी 2.0 (Indian Post IT Modernization Project Phase-II) की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत देशभर के 1.65 लाख से अधिक डाकघरों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में सेवाओं को रियल टाइम डिजिटल सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जा सके।

अब कोर बैंकिंग सॉल्यूशन के तहत ग्राहक अपने IPPB ऐप या QR कोड के माध्यम से ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। कोर इंश्योरेंस और पार्सल ट्रैकिंग सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवकों को हैंडहेल्ड डिवाइस देकर डीबीटी भुगतान, जमा-निकासी व मनी ऑर्डर जैसी सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही हैं।डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ भारतीय डाक विभाग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अग्रसर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से पार्सल पैकेजिंग में इको-फ्रेंडली मटेरियल का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। देशभर में वृक्षारोपण व सफाई अभियान आयोजित किए गए हैं। कई डाकघरों में अब सौर ऊर्जा उपकरण और पेपरलेस सिस्टम अपनाए जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहन मिल रहा है।भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी पर्यावरण थीम आधारित डाक टिकट भी लोगों को हरित भविष्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी विभाग लगातार पर्यावरण, हरित ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने का संदेश दे रहा है।गली से ग्लोबल तक, भारतीय डाक आज न केवल सेवा, विश्वास और पारदर्शिता का प्रतीक है, बल्कि यह डिजिटल इंडिया और हरित भारत के निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
