मैच का इकलौता गोल बॉनमती ने 113वें मिनट में किया। उन्होंने बाएं फ्लैंक से गेंद पाते हुए जर्मन गोलकीपर एन-कैट्रिन बर्गर की नजदीकी पोस्ट पर छोड़े गए गैप को भांपते हुए टाइट एंगल से जोरदार शॉट मारकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। पहले हाफ में स्पेन की कप्तान आइरीन परेडेस ने भी हेडर से गोल करने की कोशिश की, लेकिन उनका शॉट पोस्ट से टकराकर बाहर चला गया। पूरे मैच में स्पेन ने कब्जे में बढ़त बनाए रखी, जबकि जर्मन टीम ने डिफेंस में मजबूत दीवार खड़ी कर काउंटर अटैक की रणनीति अपनाई।

जर्मनी की विंगर क्लारा बुएल मैच भर में प्रभावशाली रहीं। 63वें मिनट में वह स्पेनिश डिफेंस को चकमा देकर गोल के करीब पहुंचीं, लेकिन उनका शॉट सीधे गोलकीपर काटा कॉल के हाथों में चला गया। स्टॉपेज टाइम में भी बुएल का एक डिफ्लेक्टेड शॉट कॉल ने बड़ी मुश्किल से बचाया, और मैच 0-0 से अतिरिक्त समय में चला गया। जर्मनी ने अब तक यूरो सेमीफाइनल में 10 में से 9 बार जीत दर्ज की थी। जर्मनी पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ता दिख रहा था, लेकिन बॉनमती ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। बॉनमती के लिए यह गोल और भी खास था, क्योंकि टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले वह मेनिन्जाइटिस से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थीं। यह जीत स्पेन के लिए ऐतिहासिक रही, क्योंकि पहली बार उन्होंने किसी बड़े टूर्नामेंट में जर्मनी को हराया।

मैच के बाद बॉनमती ने कहा, “मैं गर्व महसूस कर रही हूं। हमने एक जबरदस्त चैम्पियनशिप खेली है। आज हम जर्मनी के खिलाफ जरूर थोड़ा संघर्ष में रहे, लेकिन अंत में जीत हमारे हिस्से आई। ये पहली बार है जब हमने किसी बड़े टूर्नामेंट में जर्मनी को हराया है, इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है।”

क्वार्टरफाइनल में फ्रांस के खिलाफ शूटआउट में अपनी टीम को जीत दिलाने वाले जर्मन गोलकीपर एन-कैट्रिन बर्गर ने इस हार की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, “उस गोल के लिए मैं दोषी हूं। नजदीकी पोस्ट को मुझे कवर करना था और यही वजह है कि मैं खुद से बेहद निराश हूं। मैं चाहे जितने भी बचाव करूं, लेकिन वह गोल रोकना मेरा फर्ज था।”

अब सभी की निगाहें रविवार को होने वाले फाइनल मुकाबले पर हैं, जहां स्पेन और इंग्लैंड के बीच एक और ऐतिहासिक भिड़ंत देखने को मिलेगी।

By editor

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