प्रधानमंत्री के साथ-साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नितिन गडकरी, अश्विनी वैष्णव, किरेन रिजिजू, जी. किशन रेड्डी, रवनीत सिंह बिट्टू, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अन्य केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों ने अपने-अपने वोट डाले।

इंडी गठबंधन के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह लोगों की अंतरात्मा को जगाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि वे चुनाव जीतेंगे।

वोट डालने आए भाजपा सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा कि पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है और एक अच्छे अंतर से जीतने का विश्वास रखती है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मतदान के बाद कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सीपी राधाकृष्णन विजयी होंगे।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर समेत अन्य सांसदों ने वोट डाले। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा व्हीलचेयर पर संसद पहुंचे और वोट डाला।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदान के बाद भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा का काम दलों को इस्तेमाल करके बर्बाद करने का रहा है।

इस चुनाव में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और पंजाब की शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और एक निर्दलीय सांसद ने वोटिंग में हिस्सा न लेने का फैसला किया।

बीजद के सात राज्यसभा सांसदों ने यह कहते हुए मतदान में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया कि उनकी पार्टी एनडीए और विपक्षी इंडी गठबंधन से समान दूरी बनाए रखना चाहती है। शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में बाढ़ और केंद्र सरकार की निष्क्रियता का हवाला देकर मतदान में भाग न लेने का ऐलान किया। वहीं, बीआरएस ने यूरिया की कमी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की उदासीनता के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट डाल सकते हैं, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं। कुल 788 सांसदों में से 781 सांसद ही इस बार मतदान के पात्र थे, क्योंकि छह राज्यसभा और एक लोकसभा सीट रिक्त हैं। लेकिन बीजद, बीआरएस और अकाली दल के कुल 14 सांसदों ने मतदान से दूरी बनाकर यह संख्या घटाकर 767 कर दी है। अब बहुमत का आंकड़ा 384 हो गया है।

लोकसभा में एनडीए के पास कुल 293 सांसदों का समर्थन है, जिसमें बीजेपी के 240, टीडीपी के 16, जेडीयू के 12, शिवसेना के सात और लोजपा के पांच सांसद शामिल हैं। राज्यसभा में एनडीए के पास 125 सांसदों का समर्थन है, जिसमें बीजेपी के 102 सांसद और वाईएसआर कांग्रेस के सात सांसद भी शामिल हैं।

By editor

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