दिल्ली | लद्दाख की राजधानी लेह बुधवार को उस समय दहशत में आ गई जब प्रदर्शनकारियों ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

यह विरोध लंबे समय से simmer हो रही असंतोष की आग का नतीजा था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख की जनता लगातार अपने संवैधानिक अधिकारों, छठे अनुसूची में शामिल किए जाने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि बड़े उद्योगों और बाहरी निवेश को बढ़ावा देने की वजह से स्थानीय आबादी के अस्तित्व और रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।

बुधवार को प्रदर्शन अचानक तेज हुआ। गुस्साए लोगों ने भाजपा कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और थोड़ी देर में वहां आगजनी हो गई। आग की लपटें फैलने के साथ ही स्थिति बेकाबू हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की, लेकिन इस दौरान हुई गोलीबारी में चार लोगों की जान चली गई।घटना के बाद प्रशासन ने पूरे लेह और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और इंटरनेट सेवाओं पर भी नज़र रखी जा रही है। स्थानीय धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने शांति बनाए रखने की अपील की है, मगर साथ ही केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि जनता की मूल समस्याओं को गंभीरता से समझा जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि गहरे असंतोष का नतीजा है। यदि जल्द ही ठोस पहल नहीं की गई तो लद्दाख में असंतोष और बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
