विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने आज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंदुओं की नृशंस हत्या, दंगे, आगजनी, हिंसा, लूटपाट एवं बड़े पैमाने पर पलायन की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मुर्शिदाबाद की पूरी घटना की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग की तथा कहा कि मालदा में राहत शिविरों में रहने को मजबूर हिंदू समुदाय की सहायता के लिए संगठनों को आगे आने से रोकना भी एक अमानवीय कृत्य है।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मुद्दा यह है कि अगर बांग्लादेश इसमें शामिल था और उसे लगता है कि बीएसएफ जिम्मेदार है, तो फिर अधिकार क्षेत्र एनआईए का है। क्या वह केंद्र सरकार से एनआईए से इसकी जांच करवाने के लिए कहेगी? मुझे लगता है कि हमारे अपने सुरक्षा बलों के खिलाफ इस तरह के गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं दिए जाने चाहिए। कोई सबूत पेश नहीं किया गया है। यह राजनीति का सबसे निचला स्तर है जहां आप मुस्लिम मौलवियों की एक बैठक में इस तरह के झूठे आरोप लगाते हैं। केंद्र को यहां राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में सोचना चाहिए। 

संशोधित वक्फ अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद के कुछ इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हो गये थे। इसके बाद इलाके में पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय बलों कीतैनाती की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कहा है कि हिंसा के कारण सैकड़ों महिलाओं को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, जिनमें से कई ने भागीरथी नदी पार कर पड़ोसी मालदा जिले में शरण ली।

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