प्रशिक्षण में कुल 12 सत्र आयोजित हुए। पहले दिन प्री-टेस्ट, आधारशिला, नवचेतना का परिचय, 3-6 वर्ष के बच्चों के विकासात्मक क्षेत्र, ईसीसीई हेतु खेल आधारित गतिविधियां और कैलेंडर पर चर्चा की गई। दूसरे दिन का फोकस पोषण पर रहा। इसमें कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल, हाइजीन व आहार संबंधी दिशानिर्देश, पोषण टेकर और ईसीसीई में सामुदायिक सहभागिता पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ परिचर्चा एवं गतिविधियाँ आयोजित की गईं। अंतिम दिन दिव्यांग बच्चों की जांच और सहभागिता, नवचेतना के साप्ताहिक कैलेंडर, सीखने के प्रतिफल और मूल्यांकन पर सत्र आयोजित हुआ। समापन सत्र में पोस्ट-टेस्ट लिया गया जिसमें प्रतिभागियों ने 14 प्रश्नों में से औसतन 9-10 प्रश्न सही उत्तर दिए।

इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो के संसाधन अधिकारी अजय बिजल्वाण ने उपभोक्ता जागरूकता संबंधी जानकारी दी। कार्यक्रम में बाल विकास परियोजना अधिकारी बबिता शाह, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से मास्टर ट्रेनर संजय सेमवाल, जफर, शौभित रावत, सुपरवाइज़र अर्जुना चौहान, सुलोचना शाह, कल्पना बिष्ट व जयवन्ती नोटियाल उपस्थित रहे।

सुलोचना शाह ने बताया कि यह प्रशिक्षण अत्यंत लाभकारी रहा और सभी प्रतिभागियों ने गहरी रुचि से इसमें भाग लिया। समस्त स्टाफ एवं प्रतिभागियों ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर्स का आभार व्यक्त किया।

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