जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि

जनपद में इस मानसून सीजन में साढ़े आठ सौ करोड़ का नुक्सान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस में 50 फीसदी नुकसान सिंचाई विभाग के परिसंपत्ति का हुआ है और इस में गंगोत्री हाईवे का हुऐ नुकसान अलग है उसका बीआरओ अलग से भारत सरकार से मागा करेंगे।

गौरतलब है कि साल 2012-2013 में गंगा घाटी में आई भीषण आपदा के बाद साल 2025 में आपदा से जनपद को सबसे अधिक आर्थिक नुकसान हुआ है।

दरअसल, आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी विभागों से और जिलों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी थी। ऐसे में विभागों और से प्राप्त नुकसान के रिपोर्ट को आपदा प्रबंधन विभाग ने कंपाइल कर लिया है। वहीं, भारत सरकार की ओर से गठित नुकसान के आकलन के लिए टीम अगले हफ्ते, उत्तरकाशी के हर्षिल- धराली पहुंची थी।

उत्तरकाशी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते आपदा जैसे हालत बनते रहे हैं। खासकर मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में स्थितियां काफी अधिक गंभीर हो जाती हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा की वजह से हर साल जनपद को काफी अधिक आर्थिक क्षति होती है। साल 2025 में साल 2013 के बाद सबसे बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार साल 2025 में अभी तक साढ़े आठ सौ करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक स्थिति हो चुकी है। जिसकी रिपोर्ट लगभग तैयार की जा चुकी है। जल्द ही इसका मेमोरेंडम तैयार कर राज्य को भेजा जाएग। ताकि सरकार की ओर से आर्थिक मदद की जा सके।

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