लखनऊ। प्रदेश सरकार ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। सभी मंडलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है और नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान कर विस्तृत सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने 22 नवंबर को सभी जिलाधिकारियों व पुलिस अधिकारियों को घुसपैठियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था, जिसके बाद शासन-स्तर पर लगातार बैठकें और समन्वय बढ़ा दिया गया है।राज्य गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन पूरा होने तक संदिग्ध विदेशी नागरिकों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा। इस कार्यवाही की जिम्मेदारी मंडलायुक्तों, नगर आयुक्तों तथा स्थानीय पुलिस-प्रशासन को सौंपी गई है। सभी नगर निकायों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्रों में रह रहे ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर तत्काल रिपोर्ट शासन को भेजें, जिन पर अवैध प्रवेश, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध गतिविधियों का संदेह हो।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि विदेशी नागरिकता से जुड़े मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जोड़कर गंभीरता से देखा जाए। इसके लिए नगर निगम, स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिक समाजिक ताने-बाने, सुरक्षा ढांचे और स्थानीय संसाधनों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं, इसलिए ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।गृह विभाग ने बताया कि डिटेंशन सेंटरों में सुरक्षा, निगरानी और रख-रखाव की जिम्मेदारी संबंधित मंडलों को दी जा रही है। शासन का मानना है कि यह मॉडल प्रदेशभर में लागू होने के बाद घुसपैठ की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सभी जिलों को निर्देश है कि वे बिना किसी देरी के सत्यापन अभियान को प्राथमिकता पर पूरा करें और संदिग्धों के संबंध में विस्तृत विवरण उपलब्ध कराएँ।
