मेरठ की जिला जेल में आरोपी साहिल और मुस्कान का 14 दिन बाद अंततः आमना-सामना हुआ। दोनों को 2 अप्रैल को वर्चुअल पेशी के लिए कोर्ट में लाया गया था। उनकी वकील, रेखा जैन, विस्तृत जानकारी के साथ कोर्ट में मौजूद थीं। जज ने पहले दोनों के नाम पूछे और फिर केस की सुनवाई शुरू होने से पहले ही अगली तारीख 15 अप्रैल फिक्स कर दी। इस पेशी के दौरान दोनों के व्यवहार में क्या बदलाव आया और क्या उनकी बातचीत संभव हो पाई, इसे समझने के लिए दैनिक भास्कर ने जेल अधीक्षक और अन्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त की।

1 अप्रैल, 2025 को साहिल और मुस्कान की न्यायिक हिरासत के 14 दिन पूरे हो गए थे। इस दौरान पुलिस ने उनका कस्टडी रिमांड नहीं मांगा, इसलिए उन्हें कोर्ट में पेश करना आवश्यक हो गया। जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें वर्चुअल रूप से पेश करने का प्रस्ताव दिया। 2 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे मुस्कान को महिला बैरक और साहिल को पुरुष बैरक से बाहर लाया गया, लेकिन दोनों अलग-अलग बैरकों में थे, जिससे उनका आमने-सामने आना संभव नहीं था। उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में लाया गया, जहां पहले से जेल के वरिष्ठ अधीक्षक और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

जब दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में लाया गया, तब यह पहली बार था जब उन्होंने एक-दूसरे को देखा। मुस्कान को साहिल को देखकर इमोशनल होता हुआ देखा गया, जबकि साहिल ने भी मुस्कान से बात करने की कोशिश की। जेल पुलिस द्वारा उन्हें एक-दूसरे से दूर ले जाने के बावजूद, उनकी आंखों में आंसू थे, जो उनके दर्द और प्यार को दर्शा रहे थे। वकील रेखा जैन कोर्ट में उनकी स्थिति के बारे में जानकारी रखने के लिए तैयार थीं। जब जज ने उन्हें नाम से बुलाया, तो उन्होंने माइक पर अपने नाम बताए और जज ने दोनों को अगली पेशी की तारीख बताई।

जज के आदेश के बाद, दोनों को वापस बैरक में ले जाया गया। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन जेल पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मुस्कान ने महिला पुलिस से कहा कि वह साहिल से केवल दो मिनट बात करना चाहती है, क्योंकि उन्होंने शादी की है और मिलने का अधिकार रखती हैं। हालांकि, जेल अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि बिना कोर्ट की अनुमति के यह संभव नहीं है।

इन सब घटनाओं के बीच, जेल में महिला बंदियों के बैरक में आध्यात्मिक गतिविधियां चल रही थीं। मुसीबत के दौरान, मुस्कान और साहिल नशे की लत के कारण भी परेशान थे। जेल प्रशासन ने उनकी काउंसलिंग और दवा का प्रबंध किया है। जेल अधीक्षक ने कहा कि उपचार को 15 दिन तक जारी रखा जाएगा।

इसी बीच, सौरभ की मां, रेनू, ने मांग की है कि साहिल और मुस्कान को अलग जेल में भेजा जाए ताकि उन्हें एक-दूसरे से मिलने का मौका न मिले। उन्होंने कहा कि वे इस मांग को अपने वकील के माध्यम से पेश करेंगे। इस मुद्दे पर जेल अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार वह केवल वकील या रक्त संबंधियों के माध्यम से मिल सकते हैं। साहिल और मुस्कान पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर सौरभ की हत्या की और उसके शव को 4 टुकड़ों में काटकर छुपा दिया था। इसके बाद दोनों कई दिन उत्तराखंड और हिमाचल में घूमते रहे, जबकि पुलिस को बाद में इस मामले का पता चला।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच, वर्तमान में मानवीय संबंध, न्याय और सुरक्षा के सभी पहलुओं का संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

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