कानपुर में एक डेंटिस्ट डॉ. अनुष्का तिवारी द्वारा किए गए हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत की घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। पहले इंजीनियर पनकी पावर प्लांट के सहायक अभियंता विनीत दुबे थे, जिनकी मौत ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर हुई। इसके बाद फर्रुखाबाद के इंजीनियर मयंक कटियार की भी मौत हुई, जिसमें दोनों की परिस्थितियाँ एक समान थीं। दोनों इंजीनियरों को सिर में तेज दर्द और चेहरे पर सूजन की शिकायत थी, जिसके बाद उनकी अचानक तबियत बिगड़ गई। इस मामले में पुलिस ने अपनी जांच शुरू की है और डॉ. अनुष्का फिलहाल ‘लापता’ बताई जा रही हैं।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों के ऑपरेशन को डॉ. अनुष्का ने अपने ऑपरेटिंग टेक्नीशियन द्वारा करवाया था और दवाएं सादे पर्चों पर लिख कर दी गई थीं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जब स्थिति बिगड़ी, तो उन्हें दूसरे डॉक्टरों के पास जाने की सलाह दी गई थी। विनीत के मामले में, डॉ. अनुष्का ने उन्हें खुद अस्पताल में भर्ती कराया था। अब पुलिस की ओर से सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि वह यह साबित करे कि इन मौतों का कारण हेयर ट्रांसप्लांट में लापरवाही है।
विनीत दुबे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस के पास है, लेकिन मयंक कटियार का शव बिना पोस्टमॉर्टम के अंतिम संस्कार कर दिया गया, जो जांच में बाधा डाल सकता है। मामला तब पुलिस के ध्यान में आया जब विनीत के परिवार ने शिकायत की और उनकी पत्नी ने थाना में FIR दर्ज़ कराई। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, और गवाहों के बयानों के जरिए यह साबित करने का प्रयास कर रही है कि डॉ. अनुष्का की लापरवाही इन मौतों का कारण बनी।
दैनिक भास्कर ने डॉ. अनुष्का की क्लिनिक से ट्रांसप्लांट कराकर सुरक्षित बाहर आए एक पेशेंट, रामजी सचान से भी बातचीत की। उन्होंने डॉ. अनुष्का की क्लिनिक में मौजूद स्टाफ की प्रोफेशनलिज्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीशियनों के पास सही प्रशिक्षण की कमी थी। रामजी ने खुद के ट्रांसप्लांट के अनुभव को खौफनाक बताया, जहां उन्हें छह घंटे तक भयंकर दर्द सहना पड़ा। उनका कहना था कि सभी दवाएं सादे पर्चों पर लिखी गई थीं, जो कि एक चिकित्सक के पास होने चाहिए थे।
इस भयानक घटना में कानपुर के ACP कल्याणपुर, अभिषेक पांडेय ने भी ऐलान किया कि डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद से कई बार पुलिस ने उन्हें बुलाने का प्रयास किया, लेकिन वे लगातार समझौता करती रहीं। इसके चलते अब मामलों में गैर इरादतन हत्या की धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। कानपुर के CMO ने भी इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है, जो यह जाँच करेगी कि यह क्लिनिक कब से चल रहा था और किन योग्यताओं के आधार पर यहां सर्जरी की जा रही थी।
ये घटनाएं यह प्रश्न खड़ा करती हैं कि क्या हेयर ट्रांसप्लांट जैसी सर्जरी को बिना उचित प्रशिक्षण और डिग्री के डॉक्टर करना उचित है? कानपुर के सीनियर एडवोकेट नरेश मिश्रा का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, तो भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई की जा सकती है। हालांकि, बिना पोस्टमॉर्टम के न तो मौत का कारण स्पष्ट किया जा सकता है और न ही मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है।
इस केस ने कानपुरवासियों में भय और संदेह का माहौल पैदा कर दिया है, और विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। जांच के परिणाम और इससे जुड़े सभी पहलुओं पर नजर रखना आवश्यक हो गया है ताकि भविष्य में ऐसे ही किसी और को इस तरह की दुर्घटना का सामना न करना पड़े।
