जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित Munich Security Conference में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संयुक्त राष्ट्र पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज के सबसे गंभीर वैश्विक संकटों में United Nations पूरी तरह विफल साबित हुआ है। रूबियो ने कहा कि न तो UN Ukraine युद्ध को सुलझा सका और न ही Gaza संघर्ष में कोई ठोस भूमिका निभा पाया। “आज की सबसे ज्वलंत समस्याओं पर संयुक्त राष्ट्र के पास कोई जवाब नहीं है”  ।

उन्होंने दावा किया कि रूस-यूक्रेन शांति वार्ता के लिए दोनों पक्षों को एक ही टेबल पर लाने में अमेरिका की निर्णायक भूमिका रही। गाजा का जिक्र करते हुए रूबियो ने कहा कि वहां “बर्बरों” के कब्जे से बंधकों को छुड़ाने का काम भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने नहीं, बल्कि अमेरिका ने किया। ईरान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जून 2026 में हुए 12-दिवसीय संघर्ष के दौरान UN तेहरान के कट्टरपंथी शिया नेतृत्व के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में पूरी तरह असहाय रहा। “इसके लिए अमेरिकी B-2 बमवर्षकों द्वारा सटीक हमलों की जरूरत पड़ी,” रूबियो ने कहा, इशारों में Iran के परमाणु कार्यक्रम पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र में “भलाई के लिए एक बड़ा उपकरण बनने की क्षमता” अब भी मौजूद है, लेकिन मौजूदा हालात में वह वैश्विक नेतृत्व देने में नाकाम रहा है।अपने भाषण में रूबियो ने यूरोप को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका ट्रांसअटलांटिक गठबंधन से पीछे हटने वाला नहीं है। “हमारा घर भले ही पश्चिमी गोलार्ध में हो, लेकिन हम हमेशा यूरोप की संतान रहेंगे,” उन्होंने कहा। यह बयान 2025 के सम्मेलन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के यूरोप-आलोचनात्मक भाषण से बिल्कुल उलट माना जा रहा है।

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