रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि भारत ने वॉशिंगटन को भरोसा दिया है कि वह रूस से अतिरिक्त तेल नहीं खरीदेगा। रुबियो ने 14 फरवरी को रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि नए तेल सौदे नहीं किए जाएंगे, हालांकि मौजूदा ऑर्डर प्रक्रिया में बने रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

 

इस बयान पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उसी सम्मेलन के अगले सत्र में स्पष्ट और संतुलित प्रतिक्रिया दी। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ चर्चा में जयशंकर ने कहा कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देश किसी भी तरह के बाहरी दबाव में अपने फैसले नहीं करता।जयशंकर ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति उपलब्धता, लागत और जोखिम जैसे व्यावहारिक कारकों पर आधारित होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद जटिल है। भारत की तेल कंपनियां वही निर्णय लेंगी, जो उन्हें अपने सर्वोत्तम राष्ट्रीय और व्यावसायिक हित में लगता है।” विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भारत के पास ऐसे फैसले लेने का पूरा अधिकार है, जो पश्चिमी विचारधारा से मेल न भी खाते हों।

 

उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका ने पहले रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटा लिया था, लेकिन निगरानी अब भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव को भारतीय तेल आयात पर नजर रखने का दायित्व सौंपा है। यदि भविष्य में भारत द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल आयात फिर शुरू किए जाने की पुष्टि होती है, तो दंडात्मक शुल्क दोबारा लगाए जाने की संभावना बनी रह सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक प्रतिबंधों के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए स्वतंत्र निर्णय लेने की नीति पर कायम है।

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