जानकारी के अनुसार दरियागंज में करीब 68 साल पुरानी तीन मंजिला इमारत को तोड़ने का काम चल रहा था। इमारत को तोड़ने का काम पिछले एक माह से चल रहा था। यहां काम करने वाले मोहम्मद तुरफान ने बताया कि यहां पर कुल 15 लोग काम कर रहे थे। सभी कर्मचारी एक ठेकेदार के बुलाने पर बिहार के मधेपुरा स्थित गणेशपुरी के रहने वाले हैं। सभी कर्मचारी जिस इमारत को तोड़ रहे थे। उसी इमारत में एक कमरे में रह रहे थे।

तुरफान ने बताया कि उन्हें 700 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर लाया गया था। बुधवार दोपहर ज़ुबैर, गुलसागर और तौफीक इमारत का मलबा हटा रहे थे। तभी अचानक उनके ऊपर दीवार गिर गई. हादसे के बाद अफरा तफरी मच गई।

मोहम्मद इकबाल ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे की घटना है। दीवार गिरने से ज़ुबैर, गुलसागर और तौफीक दब गए। उन्हें हम लोगों ने निकाला। आसपास के लोग देखते रहे, लेकिन किसी ने एंबुलेंस को फोन नहीं किया। हम लोग खून से लथपथ अपने तीनों साथियों को कंधे पर लेकर बाहर की ओर भागे और एक वाहन के जरिए एलएनजेपी अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां पर ज़ुबैर, गुलसागर और तौफीक को डाॅक्टराें ने मृत घोषित कर दिया।

तुरफान ने बताया कि हादसे में उनके साथी ज़ुबैर, गुलसागर और तौफीक की मौत हो गई. ठेकेदार सुबह काम बताकर चला जाता था। वह हादसे के बाद से मौके पर नहीं आया। उन लोगों के पास पैसे नहीं हैं. जिन लोगों की मौत हुई है, उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं. ऐसे में मकान मालिक और ठेकेदार को मुआवजा देना चाहिए, जिससे ज़ुबैर, गुलसागर और तौफीक के बच्चे पल सकें। इसके साथ ही तीनों का शव उनके मधेपुरा बिहार ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए, क्योंकि अभी हम लोगों को वेतन नहीं मिला है कि खुद से एंबुलेंस बुक कर शव को बिहार ले जा सकें। वहीं घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ और एमसीडी की टीम मौके पर पहुंची और मलबा हटाने का कार्य शुरू किया। मलबे को हटाने का काम जेसीबी के जरिए तेजी से किया गया है।

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