उत्तर प्रदेश एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने बीते गुरुवार देर रात आजमगढ़ जिले के रौनापार इलाके में हुई मुठभेड़ में ₹50,000 के इनामी बदमाश वाकिफ को मार गिराया। वाकिफ पर गौ तस्करी, हत्या, लूट और चोरी जैसे कई संगीन अपराधों के 44 से अधिक मामले दर्ज थे।

कब और कैसे हुई मुठभेड़
एसटीएफ की डिप्टी एसपी डी.के. शाही के नेतृत्व में टीम को सूचना मिली थी कि वाकिफ रौनापार थाना क्षेत्र के जंगलों में छिपा हुआ है और कोई नई वारदात की योजना बना रहा है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की और जैसे ही वाकिफ को घेरा गया, उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें वाकिफ गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार सुबह उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई।

लंबे समय से वांछित था वाकिफ
वाकिफ आजमगढ़ के एक गांव का रहने वाला था और पिछले कई सालों से पुलिस की वांछित सूची में शामिल था।
उसके खिलाफ आजमगढ़, गोरखपुर, कुशीनगर, संत कबीर नगर, जौनपुर और सुल्तानपुर जैसे जिलों में कुल 44 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें शामिल थे — 15 से अधिक गौ तस्करी के मामले, 3 हत्या के प्रयास के केस, 4 लूट की वारदातें, चोरी और अवैध हथियार रखने के कई आरोप। 2023 में गोरखपुर में हुई एक गौ तस्करी की बड़ी वारदात में उसका नाम सामने आने के बाद उस पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस के अनुसार, वाकिफ का गिरोह पूरे पूर्वांचल में सक्रिय था और वह नेपाल बॉर्डर के रास्ते तस्करी का नेटवर्क चलाता था।

पुलिस को मिले हथियार और सबूत
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी कट्टा, 2 जिंदा कारतूस, एक खाली खोका और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि मिले हुए हथियारों और सामान की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।

सहयोगियों की तलाश जारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वाकिफ के दो साथी अभी भी फरार हैं। एसटीएफ की टीम उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वाकिफ के मारे जाने से गौ तस्करी और आपराधिक गिरोहों को बड़ा झटका लगा है।

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