**उत्तर प्रदेश में राशन वितरण में घटतौली: अधिकारियों का हाथ और कोटेदारों के अनैतिक तरीके**

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामने आए एक हालिया खुलासे में राशन वितरण के दौरान घटतौली के कई तरीके उजागर हुए हैं। दैनिक भास्कर की एक टीम ने इन तरीकों का पर्दाफाश करते हुए बताया कि कैसे कई कोटेदार सरकारी राशन की चोरी के लिए असामान्य और अनैतिक तरीके अपना रहे हैं। वीडियो के जरिए कैद हुए इन कोटेदारों ने साक्षात्कार में बताया कि वो किस प्रकार राशन का माप कम करते हैं और यह सब करते समय उन्हें अपने उच्च अधिकारियों के आशीर्वाद की भी आवश्यकता होती है।

बाराबंकी में कोटेदार राधेलाल बौद्ध ने खुलासा किया कि वो अपने बोरों में पानी डालकर वजन बढ़ा देते हैं, ताकि अधिक राशन का वितरण दिखा सकें। उन्होंने बताया कि राशन वितरण से पहले बोरे के अंदर पानी भर देने से दो से ढाई क्विंटल अधिक राशन बचता है। इसके साथ ही, वो तराजू का गलत उपयोग भी करते हैं, जहां आधा किलो वजन घटाने के लिए एक खाली बोरा रख लेने की सलाह दी जाती है। इसी प्रकार के कई तरीके उन्होंने साझा किए, जो बिल्कुल गंधील व्यवहार हैं।

अंबेडकरनगर के कोटेदार फेकूराम ने बताया कि वह नए तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हुए ग्राहक की अंगूठे को मशीन से रिमोट के जरिए कम तौले हुए राशन के वितरण में मदद करते हैं। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में स्थानीय सप्लाई इंस्पेक्टर को हर महीने 1500 रुपये देने पड़ते हैं जिससे यह सब कार्य सुचारु रूप से चलता रहे। फेकूराम ने बताया कि वो 35 से 40 हजार रुपये महीने की कमाई आसानी से कर लेते हैं, जबकि ग्राहकों को वास्तविक राशन से कम वितरण किया जाता है।

उन्नाव के कोटेदार अयोध्या प्रसाद के बेटे दिलीप ने भी ऐसा ही तरीका अपनाया है। उन्होंने बताया कि वह तौलने के दौरान राशन को बाल्टी में रखकर घटाते हैं और फिर ग्राहक को कम राशन देते हैं। इस प्रकार से, उनका भी लक्ष्य सरकार के नियमों की धज्जियाँ उड़ाना और अपनी जेब भरना है।

इन सभी खुलासों के बाद स्पष्ट रूप से यह सामने आता है कि राशन वितरण में घटतौली केवल एक अपराध नहीं, बल्कि यह एक संगठित व्यवसाय की तरह कार्य कर रहा है। इसमें न केवल कोटेदार शामिल हैं, बल्कि उनके साथ-साथ खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी भी इसी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। यदि इस स्थिति पर उचित नियंत्रण नहीं रखा गया, तो यह गरीब और जरूरतमंद लोगों के जीवन को और अधिक कठिन बना देगा। ऐसे में राज्य सरकार को इस मामले की गम्भीरता को समझते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस पूरी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में राशन वितरण का सिस्टम कितना कमजोर है और यह जरूरतमंदों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। यदि जल्द ही इस पर कड़ा कानून और निगरानी नहीं की गई, तो स्थिति न केवल बिगड़ सकती है बल्कि इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा।

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