उत्तर प्रदेश के डीएम (जिलाधिकारी) की संपत्तियों की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर से सुर्खियाँ बटोरी हैं। आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी, जो प्रदेश के सबसे धनी डीएम माने जाते हैं, के पास अब 15 संपत्तियाँ हैं, जबकि पाँच वर्ष पूर्व उनके पास ये संख्या 12 थी। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के 19 जिलाधिकारियों की संपत्ति पिछले 5 साल में ब बढी है, जिनमें कुछ की संपत्ति तो दोगुनी और कई की चार गुना बढ़ गई है। कुल मिलाकर, प्रदेश के 75 जिलाधिकारियों में से 27 ने लखनऊ में संपत्ति खरीदी है, जो उनकी अब तक की सबसे पसंदीदा जगह मानी जा रही है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की आय का विवरण भी इस रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा है। IAS अधिकारियों की सैलरी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 7वें वेतन आयोग के तहत होती है और यह उनके पद, अनुभव और सेवा अवधि पर निर्भर करती है। जिलाधिकारियों की मासिक आय 1.50 से 2.25 लाख रुपये के बीच है। लखनऊ में संपत्ति खरीदारी भी इन अधिकारियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। लखनऊ के महंगे इलाकों जैसे गोमती नगर और सुशांत गोल्फ सिटी में कई अधिकारियों ने अपने लिए प्रॉपर्टी खरीदी है।

हालांकि, कुछ जिलाधिकारियों का ऐसा भी हाल है कि उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। लखनऊ, गोरखपुर और गाजियाबाद जैसे शहरों के DM इसके उदाहरण हैं। इसके अलावा, कुछ जिलाधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, जब बात विभिन्न मंडलों के जिलाधिकारियों की संपत्ति की आती है, तो आगरा के DM अरविंद मलप्पा 11 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं, जबकि दूसरे स्थान पर मथुरा के DM चंद्रप्रकाश सिंह 1.44 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ हैं।

प्रयागराज मंडल में, सबसे अमीर DM शिव सहाय अवस्थी हैं, जिन्होंने हाल ही में 5.54 करोड़ रुपये की कृषि भूमि खरीदी है। इसी तरह, कानपुर मंडल में, फर्रुखाबाद के DM आशुतोष कुमार द्विवेदी की संपत्ति की कुल कीमत 5.29 करोड़ रुपये है। मंडल के अन्य अधिकारियों की संपत्तियाँ भी उल्लेखनीय हैं, जिनमें कई ने हाल के वर्षों में कृषि भूमि और मकान खरीदे हैं।

इसी रिपोर्ट में आगे ये भी पता चला कि कई जिलों में DM की संपत्ति में वृद्धि हुई है, जबकि कुछ की संपत्ति स्थिर रही है। इस प्रकार, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि कई IAS अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों को सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया है, जो कि उनके पद की ताकत को दर्शाती है। ये रिपोर्ट केवल एक वित्तीय स्केन नहीं है, बल्कि इन अधिकारियों के जीवनशैली और उनके निर्णयों की भी एक झलक प्रस्तुत करती है, जिससे पता चलता है कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास आर्थिक समृद्धि के क्या मायने हैं।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights