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देहरादून, 21 फरवरी । उत्तराखण्ड पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को और तेज करते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश जारी किए हैं। नशा तस्करी के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखण्ड पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ वी मुरूगेशन ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त जनपदीय पुलिस प्रभारियों, एसटीएफ एवं परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों के साथ वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े मामलों की समीक्षा की। बैठक में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित वाणिज्यिक मात्रा के कुल 77 प्रकरणों की अभियोगवार समीक्षा की गई। इनमें गढ़वाल परिक्षेत्र के 33 तथा कुमायूं परिक्षेत्र के 44 मामले शामिल हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि साक्ष्यों के आधार पर एनडीपीएस एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और पिट एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा धारा 68 के तहत आरोपितों की अवैध संपत्ति के अधिग्रहण की प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने नशा तस्करी में संलिप्त मुख्य सरगनाओं के नेटवर्क को चिन्हित कर उन्हें ध्वस्त करने के निर्देश दिए। अभ्यस्त अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलकर नियमित निगरानी रखने, भारत सरकार के संबंधित पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने तथा परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों को मामलों की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। एसटीएफ को भी जनपदों में पंजीकृत वाणिज्यिक मामलों की विवेचना की निरंतर समीक्षा कर अद्यतन प्रगति से अवगत कराने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी के मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में मादक पदार्थ की परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बावजूद विवेचना लंबित है, उन्हें एक माह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। हरिद्वार के दो तथा देहरादून और नैनीताल के एक-एक प्रकरण में अन्वेषण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विवेचकों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

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