कार्यशाला में मूक-बधिर संघ के प्रतिनिधियों ने पुलिसकर्मियों को विशेष संकेत भाषा का प्रशिक्षण दिया। जिससे वे सड़क पर मूक-बधिर व्यक्तियों को आसानी से समझकर उनकी सहायता कर सकें। प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ बताया कि इमरजेंसी, दिशा-निर्देश और सहायता से जुड़े संकेतों को कैसे पहचाना जाए। पुलिसकर्मियों ने भी उत्साह से भाग लेकर मौके पर ही संकेत भाषा का अभ्यास किया।
मूक-बधिर संघ ने बताया कि सड़क पर संवाद की कमी के कारण कई बार गलतफहमी या दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। ऐसे में पुलिस कर्मियों द्वारा संकेत भाषा का ज्ञान होना बेहद मददगार साबित होगा।
कार्यक्रम में मूक-बधिर व्यक्तियों की गाड़ियों पर विशेष पहचान स्टीकर भी लगाए गए, ताकि ट्रैफिक रोकने या चेकिंग के दौरान पुलिस उनकी स्थिति को पहचानकर तुरंत सहयोग दे सके। अधिकारियों ने इसे मानवीय पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी जारी रखने की बात कही।
