कानपुर, 13 मार्च । किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा ने शुक्रवार को परेड स्थित ‘टेम्पल ऑफ सर्विस’ कॉन्फ्रेंस हॉल में विश्व किडनी दिवस के अवसर पर प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों से किडनी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, नियमित जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।
आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि यह वैश्विक जागरूकता अभियान इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशंस के सहयोग से चलाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को किडनी के स्वास्थ्य के महत्व और दीर्घकालिक गुर्दा रोग के खतरों के प्रति जागरूक करना है।
वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा ने बताया कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, पथरी, बार-बार होने वाला पेशाब का संक्रमण तथा दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक अनियंत्रित उपयोग किडनी फेल होने के प्रमुख कारण हैं। किडनी को स्वस्थ रखने के लिए खाली पेट शुगर 120 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से नीचे, भोजन के दो घंटे बाद शुगर 140 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से नीचे तथा रक्तचाप 130/80 से कम रखना जरूरी है।
डॉ. देशराज गुर्जर ने कहा कि दीर्घकालिक गुर्दा रोग को अक्सर ‘खामोश बीमारी’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण देर से दिखाई देते हैं। इसलिए समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि किडनी रोग की शुरुआती पहचान के लिए मूत्र एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात और ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन दर जैसे परीक्षण महत्वपूर्ण हैं, जिनसे बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष की थीम “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य : बेहतर इलाज और उचित दवा तक समान पहुंच” रखी गई है। वहीं वित्त सचिव डॉ. विशाल सिंह ने लोगों से संतुलित आहार लेने, पर्याप्त पानी पीने, नियमित व्यायाम करने तथा धूम्रपान और शराब से दूर रहने की अपील की। इस अवसर पर आईएमए के कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।
