मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने सरकार के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाया। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं में सरकारी राहत कार्यों को लेकर सवाल खड़े किए और गन्ना भाव, रोजगार व कृषि पर टैक्स जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।टिकैत ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के दौरान सरकार की भूमिका पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “जब सरकार मदद के लिए पीछे रही, तो किसानों ने खुद आगे बढ़कर राहत कार्य संभाले। पंजाब में पशु चारे के गंभीर संकट के बीच किसानों ने लगातार मदद भेजी। हिमाचल में भी सैकड़ों कुंतल राहत सामग्री पहुंचाई गई।”युवाओं में बढ़ते अपराध के पीछे बेरोजगारी को एक बड़ा कारण बताते हुए टिकैत ने सरकार से रोजगार सृजन पर तुरंत ध्यान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार मिलना जरूरी है, नहीं तो वे गलत रास्ते पर चले जाएंगे।

हाल ही में छपार टोल प्लाजा पर हुई डिप्टी मैनेजर की हत्या का जिक्र करते हुए टिकैत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।सबसे महत्वपूर्ण बात, टिकैत ने गन्ने के दाम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए वादे को याद दिलाया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल करने का वादा किया था, लेकिन 11 साल बाद भी यह वादा अधूरा है।” इस मुद्दे पर उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल नेता जयंत चौधरी से भी किसानों की आवाज बुलंद करने की अपील की।किसानों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ का जिक्र करते हुए टिकैत ने कृषि यंत्रों पर लगने वाले 18% जीएसटी को तुरंत हटाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने कृषि उपकरणों और बिजली कनेक्शन पर भी टैक्स हटाने की जरूरत बताई।टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक किसानों को हर तरफ से राहत नहीं मिलेगी, तब तक खेती घाटे का सौदा बनी रहेगी और देश की कृषि अर्थव्यवस्था खतरे में रहेगी।

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