रामपुर के एक विवाह समारोह में हुई एक शर्मनाक घटना ने सबको चौंका दिया है। 28 फरवरी को त्रिलोकी सिंह दिवाकर की बेटी की शादी सुभाष नाम के युवक के साथ तय की गई थी। लेकिन जब दूल्हा शादी के कार्यक्रम में बोलेरो की मांग करने लगा, तो बात बुरी तरह बिगड़ गई। घटना के दौरान दूल्हे सुभाष ने न केवल दुल्हन को थप्पड़ मारा बल्कि इस मामले ने पूरे समारोह में हंगामा खड़ा कर दिया।
यह शादी छह महीने पहले तय की गई थी। दुल्हन और दूल्हा फोन पर लगातार संपर्क में थे और शादी के लिए सब कुछ तय हो चुका था। दुल्हन के पिता ने दहेज के रूप में 10 लाख रुपये और अन्य सामान दूल्हे के परिवार को पहले ही दे दिए थे। हालांकि, दूल्हे के पिता हरद्वारी ने शादी से पहले बोलेरो की मांग की, जिस पर दुल्हन के परिवार ने असमर्थता जताई। दुल्हन ने जब दूल्हे को बताया कि पहले ही इतनी राशि और सामान दिए जा चुके हैं, तो वह आगबबूला हो गया और उसने स्टेज पर दुल्हन को थप्पड़ मार दिया, जिसके कारण वह बेहोश होकर गिर पड़ी।
इस घटना के बाद बारात में हड़कंप मच गया। बारातियों और दुल्हन के परिवार वालों के बीच मारपीट हुई और कुर्सियां भी टूट गईं। दुल्हन के परिवार के कई सदस्य इस झगड़े में घायल हो गए। दूल्हे और बारातियों ने मौके से भाग निकला। पुलिस ने दूल्हे के पिता को हिरासत में लिया और अब मामले की जांच की जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर इस तरह की सोच और मांगें क्यों की जा रही हैं, जो कि समाज में महिलाओं की स्थिति को और अधिक कमजोर करती हैं।
दुल्हन ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं अब किसी भी हालत में सुभाष से शादी नहीं करूंगी। उसने मेरे सामने ऐसी घटिया सोच रखी, जिसके लिए मैं तैयार नहीं थी। उसने मुझसे बोलेरो की मांग की, जिससे मेरी बेइज्जती हुई।” उसके पिता त्रिलोकी सिंह ने भी इस शर्मनाक घटना के लिए दूल्हे और उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को जान का खतरा है और वह इस परिवार के साथ किसी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहते।
पूरे मामले में थाना प्रभारी कर्म सिंह का कहना है कि अभी तक किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिलती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि भारतीय समाज में दहेज की मांग अब भी एक गंभीर मुद्दा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। इस तरह की घटनाएं न केवल दुल्हन की गरिमा को चुनौती देती हैं, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता को भी उजागर करती हैं।