उल्लेखनीय है कि इस संबंध में उत्तराखंड जल संस्थान की ओर से बताया गया है कि फायर हाइड्रेंट के संयोजन पेयजल लाइन के टैंक से ही होती है। जब घटना हुई तब पेयजल की लाइन में चल रही कटौती के कारण पानी नहीं था। इसे चालू करने में समय लग गया। ऐसे में श्री भट्ट ने कहा कि एक ही लाइन से पेयजल वितरण और आग बुझाने के लिए प्रयोग से दुर्घटना के समय दिक्कतें आ रही हैं।
जल संस्थान व दमकल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह हर पखवाड़े नियमित रूप से हाइड्रेंट की जांच करें। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी से जांच करने को भी कहा, और घटना के कारणों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और जरूरी होने पर मजिस्ट्रेटी जांच कराने की बात भी कही।
