समिति के सदस्यों ने प्रभावित परिवारों एवं जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से विस्तृत विचार-विमर्श कर उनके सुझाव संकलित किए। प्रभावित ग्रामीणों ने जांगला, लंका एवं कोपांग में विस्थापन की मांग रखते हुए केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण की तर्ज पर धराली का पुनर्निर्माण करने का आग्रह किया। इस अवसर पर आपदा पीड़ित कौशिक पंवार ने सेब उत्पादकों के लिए सड़क मार्ग के समीप सुरक्षित भंडारण के लिए शेड निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

समिति के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि यह त्रासदी अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। केंद्र एवं राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। क्षति की भरपाई के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि आपदा में क्षतिग्रस्त फसलों एवं सेब के वृक्षों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। सड़क मार्ग बहाली का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। प्रभावित परिवारों को राहत धनराशि वितरित की जा चुकी है तथा खाद्य सामग्री एवं आवश्यक वस्तुएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही सर्च एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सड़क मार्ग के बहाल होते ही सेब के भंडारण के लिए शेड का निर्माण प्राथमिकता से कराने का भरोसा दिलाया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी युकाडा डॉ. आशीष चौहान और अपर सचिव हिमांशु खुराना ने कहा कि विस्थापन के लिए प्रभावित परिवारों को उपयुक्त विकल्प प्रदान किए जाएंगे। जिनके आधार पर विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का संपूर्ण विवरण तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।

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