मुज़फ्फरनगर। जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मरीजों के इलाज के नाम पर यहां लापरवाही और दबंगई का खेल खुलेआम चल रहा है। शुक्रवार को अस्पताल में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब इलाज कराने आई उर्मिला नामक महिला के साथ स्टाफ नर्स पूजा कौशिक ने बदसलूकी की और उसका इलाज का पर्चा फाड़ दिया। घटना से आहत महिला ने तत्काल महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आभा अत्रे से शिकायत की। सीएमएस मौके पर पहुंचीं और नर्स से बात करने लगीं, लेकिन यहां भी पूजा कौशिक का रवैया दबंगई भरा ही रहा। उसने ऊंची आवाज़ में असभ्य भाषा का प्रयोग किया और सबके सामने सीएमएस को ही झिड़क दिया।पूजा कौशिक का विवादित अतीत कोई नया नहीं है।
कुछ समय पहले यही नर्स 50 रूपये की रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद हो चुकी है। वीडियो वायरल हुआ और जांच में यह रिश्वतखोरी साबित भी हो गई थी, मगर कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ। यही कारण है कि नर्स बेखौफ होकर खुलेआम मरीजों से मनमानी कर रही है। शुक्रवार की घटना ने इस पुराने मामले को फिर से जिंदा कर दिया है और अस्पताल की साख पर गहरा दाग लगा दिया है।
इस घटनाक्रम की भनक मीडिया को लगी तो पत्रकार मौके पर पहुंचे। कैमरे ऑन होते ही नर्स पहले तो सफाई देने लगी, लेकिन जैसे ही पुराने रिश्वतकांड पर सवाल पूछा गया, वह बगलें झांकने लगी और कैमरों से बचते हुए वहां से भाग गई। यह नजारा देख मरीजों और स्टाफ में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।महिला अस्पताल में घटित यह प्रकरण न केवल मरीजों के विश्वास को तोड़ता है बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में तैनात नर्सें ही मरीजों को अपमानित करें और रिश्वत लें, तो आम आदमी इलाज के लिए कहां जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार सचमुच कोई ठोस कार्रवाई करता है या एक बार फिर यह मामला फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा।
“सूचना मिली है कि नर्स पूजा कौशिक ने किसी मरीज के साथ बदतमीजी की है, जो निंदनीय है | इस तरह का व्यवहार कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तरह की घटना पर निश्चित कार्रवाई की जाएगी। ₹50 वाली वीडियो की जांच सीएमएस कार्यालय से हो चुकी है, मगर अभी हमारे कार्यालय में लंबित है। जांच पूरी होने के बाद निश्चित कार्रवाई की जाएगी।”
सुनील तेवतिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुज़फ्फरनगर
