जानकारी के अनुसार, जालौन तहसील के छिरिया सलेमपुर निवासी अवनीश कुमार तिवारी के पिता, चंद्रशेखर तिवारी, ललितपुर जिला जेल में प्रधान बंदी रक्षक पद से 2018 में सेवानिवृत्त हुए थे। जनवरी 2025 में सांस और रक्तचाप की बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। अवनीश को अपने पिता की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के रूप में लगभग एक लाख रुपये की राशि मिलनी थी। इसके लिए उन्होंने सितंबर माह में उरई जिला जेल में अपनी फाइल दी। अवनीश की फाइल 23 सितंबर को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के यहां से पास होकर भुगतान के लिए वापस जिला जेल पहुंच गई। 25 सितंबर को जेल में तैनात कनिष्ठ लिपिक, शीलू ने अवनीश को व्हाट्सएप मैसेज करके स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वह 15,000 रुपये देगा, तो ही बिल का भुगतान होगा। अवनीश के पास तुरंत रुपये नहीं होने के कारण, महिला कर्मचारी ने उन्हें लगभग पांच बार फोन करके दबाव बनाया और दो दिन पहले राशि 10,000 रुपये पर तय कर ली। रिश्वत की इस मांग से परेशान अवनीश ने एंटी करप्शन टीम, झांसी के प्रभारी शादाब खान से संपर्क करके शिकायत दर्ज कराई। एसीबी टीम ने अवनीश को केमिकल लगे 10,000 रुपये दिए और उसे जेल के बाहर महिला कर्मचारी से मिलने के लिए भेजा। टीम के आठ सदस्य, जिनमें दो महिला कर्मी भी शामिल थीं, मौके पर तैनात हो गए। जैसे ही महिला कर्मचारी शीलू ने अवनीश से रुपयों की गड्डी ली, एसीबी की महिला कर्मियों ने तुरंत उसे दबोच लिया। रुपयों पर लगे केमिकल के सबूत के तौर पर, जब उसने अपने हाथ धोए तो पानी का रंग लाल हो गया। आरोपित महिला कर्मचारी को एसीबी टीम सदर कोतवाली ले गई। वहां उसकी तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। टीम प्रभारी शादाब खान ने पुष्टि की कि उसका इलाज चल रहा है और स्वस्थ होने के बाद कोतवाली में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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