कैलिब्रेशन फ्लाइट टेस्टिंग एयरपोर्ट और विमानन उपकरणों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। इसका उद्देश्य उड़ान के समय हवाई क्षेत्र में नेविगेशन सहायता और संचार प्रणाली जैसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और रडार की जांच करना है। किसी भी नए एयरपोर्ट पर व्यावसायिक उड़ान शुरू करने से पहले एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने के लिए यह ट्रायल आवश्यक होता है।
एयरपोर्ट पर 3,900 मीटर लंबा रनवे है। इसके दो छोर है, इन्हें रनवे 10 और रनवे 28 के नाम से जाना जाता है। गत शुक्रवार को एएआई के विमान ने पूर्वी दिशा से रनवे-10 के लोकलाइजर और ग्लाइडपाथ सिस्टम का कैलिब्रेशन टेस्टिंग की थी। साथ ही रनवे 10 के पीएपीआई लाइट्स (प्रिसिजन अप्रोच पाथ इंडिकेटर लाइट्स) का भी परीक्षण किया था। मंगलवार को रनवे 28 का परीक्षण किया गया। विमान पश्चिमी दिशा से लैडिंग कर रनवे पर लगे उपकरणों का परीक्षण किया, जो जांच में ठीक पाए गए।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने ट्रायल कर एकत्रित डाटा का अध्ययन शुरू कर दिया है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही एयरोड्रम लाइसेंस जारी किया जाएगा। यापल के अनुसार ट्रायल के दौरान सभी उपकरण सहीं काम करते पाए गए, ऐसे में एक सप्ताह के भीतर डीजीसीए से एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त हो जाएगा। फिलहाल अधिकारी नवंबर माह के अंत तक शुभारंभ की तैयारियों में जुटे हैं। एयरपोर्ट के रनवे पर दिसंबर 2024 में भी विमान उतर चुका है। इस दौरान इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस-ए320 कामर्शियल विमान वीटी-आईएफआई ने रनवे पर पहली लैंडिंग की थी। यह बड़ा यात्री विमान था। विमान ने करीब 25 मिनट हवा में आईएलएस और अन्य उपकरणों की जांच की। हालांकि, इस दौरान भी लैंडिंग व टेकऑफ कर उपकरणों की जांच की गई थी।
