ने प्याज और लहसुन में तामसिक ऊर्जा की जांच की मांग करने वाली याचिका दायर करने वाले वकील को फटकार लगाई। उन्होंने पूछा कि क्या वे ऐसी याचिकाएं रात में तैयार करते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता वकील न होते, तो भारी जुर्माना लगाया जाता। उच्चतम न्यायालय ने इसी तरह की चार और याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया।
वकील सचिन गुप्ता ने दायर याचिका में जैन समुदाय की आहार परंपराओं का हवाला दिया था, जहां जैन लोग प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों को तामसिक मानकर परहेज करते हैं। याचिका में मांग की गई थी कि प्याज और लहसुन में क्या तामसिक सामग्री है, इसकी जांच के लिए एक कमेटी के गठन का आदेश दिया जाए।
सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों ठेस पहुंचाना चाहते हैं। तब वकील सचिन गुप्ता ने कहा कि ये एक सामान्य मसला है। उन्होंने कहा कि गुजरात में कथित तौर पर प्याज के इस्तेमाल को लेकर एक तलाक का मामला सामने आया था। इस पर चीफ जस्टिस ने एतराज जताते हुए कहा कि अगली बार ऐसी निराधार याचिका लेकर आए, तो देखिएगा हम क्या करते हैं। अगर याचिकाकर्ता वकील न होता को भारी जुर्माना लगाया जाता।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका के साथ ही सचिन गुप्ता की चार और याचिकाएं भी खारिज करने का आदेश दिया। एक याचिका में सचिन गुप्ता ने शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रुप से हानिकारक सामग्री को रेगुलेट करने की मांग की गई थी। एक याचिका में संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण को सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। एक याचिका में शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा पर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
