जेटली ने कहा, “राज्य लीगें एक-दूसरे की प्रतियोगी नहीं बल्कि अपने-अपने इकोसिस्टम की फीडर हैं। हर राज्य की अपनी प्रतिभा और संरचना है। अधिक लीगों का मतलब है खिलाड़ियों के लिए अधिक मौके और यह भारतीय क्रिकेट के लिए शुभ संकेत है।”

दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) के दूसरे संस्करण पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पहली सीजन की तुलना में प्रतियोगिता का पैमाना, संगठन और गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि लीग ने न केवल खेल के स्तर को ऊंचा किया है बल्कि पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों के लिए राजधानी में एक मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासक के तौर पर हमेशा कोशिश रहती है कि पिछले सीजन से बेहतर आयोजन हो—बेहतर तैयारी, बेहतर क्रियान्वयन। इस बार की लीग अधिक पेशेवर और संरचित है। टीमें ज्यादा संगठित हैं, प्रबंधन और मजबूत है और संपूर्ण इकोसिस्टम भी विकसित हुआ है। हर साल रिकॉर्ड टूटे यह ज़रूरी नहीं, लेकिन निरंतरता और प्रतियोगिता का पैमाना अहम है। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों का फिटनेस स्तर बढ़ा है और वे घरेलू सीजन से पहले बेहतर तैयारी के साथ मैदान में उतर रहे हैं।

इस सीजन डीपीएल में दो नई टीमों को शामिल किया गया। डीडीसीए अध्यक्ष ने नए टीम मालिकों के पेशेवर दृष्टिकोण की सराहना की और कहा कि उनके आने से टूर्नामेंट में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

उन्होंने कहा कि नए टीम मालिकों ने खुद को इकोसिस्टम में बहुत अच्छे से ढाल लिया है। उनका दृष्टिकोण पेशेवर है और पुरानी टीमों ने भी सहयोग दिया है। इससे अधिक खिलाड़ियों को अवसर मिल रहे हैं, जो लीग को और मजबूत बनाता है।

डीपीएल के लाइव प्रसारण पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “स्टार स्पोर्ट्स पर प्रसारण हमारे लिए बड़ा बदलाव है। जहां कई टूर्नामेंट सिर्फ डिजिटल तक सीमित रहते हैं, वहीं टीवी पर प्रसारण हमें बेजोड़ पहुंच और दृश्यता देता है। इससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों को बड़ा लाभ होता है।”

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