श्रावण मास पर्व के सकुशल सम्पन्न होने की कामना के साथ यह अभिषेक हुआ। मंदिर न्यास के अनुसार, चौथे सोमवार की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर का व्यापक निरीक्षण करने के उपरांत मंडलायुक्त ने संगम जल से अभिषेक करने का संकल्प लिया था, जिसे मंगलवार को पूर्ण किया गया।

श्रावण मास के अंतिम सोमवार तक लाखों श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से बाबा के दर्शन-पूजन किए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास तथा पुलिस, सीआरपीएफ और पीएसी जैसी तीनों प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से तैयार एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) ने भीड़ प्रबंधन में अत्यंत सफल भूमिका निभाई। यह व्यवस्था महाकुम्भ के दौरान तैयार की गई पलट प्रवाह प्रणाली के समरूप मानी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि महाकुम्भ के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संगम तट पर विशेष कुम्भेश्वर महादेव की स्थापना की गई थी। उस समय प्रयागराज के चार स्वयंसेवक—मनोज कुमार उपाध्याय, रमेश चंद्र ओझा, कुलदीप नारायण पांडेय और राम मनोहर द्विवेदी ने सेवा कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

इसी परम्परा का निर्वाह करते हुए मंगलवार को यही चारों श्रद्धालु संगम त्रिवेणी से पवित्र जल लेकर श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और श्रावण मास के चारों सोमवार के सफल आयोजन के उपरांत बाबा विश्वेश्वर का जलाभिषेक कर महादेव के चरणों में अपनी कृतज्ञता अर्पित की।

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