कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचार गहरे, सामाजिक और जीवन को नई दिशा देने वाले थे। उन्होंने बल दिया कि उनके विचार केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर जीवन में आत्मसात किए जाने चाहिए। बतौर मुख्य अतिथि विचारक एवं समाजसेवी डॉ. वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि “न तो साम्यवाद और न ही पूंजीवाद देश को बदल सकता है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा ही राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।” उन्होंने ‘एकात्म मानववाद’ की वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इतिहास विभाग के प्रोफेसर प्रवेश भारद्वाज ने पं. उपाध्याय के दर्शन को भारतीय दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि “अंतरिक्ष में भी यदि भारतवासी जाते हैं, तो वहां भी शांति की बात करते हैं, यही भारतीय संस्कृति की आत्मा और पंडित जी के विचारों की शक्ति है।” कार्यक्रम के समापन पर पीठ के संयोजक प्रो. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि, “पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ देश का पहला ऐसा केंद्र है, जिसका उद्देश्य उनके विचारों को समाज और शिक्षा जगत तक पहुँचाना है।” कार्यक्रम की शुरुआत महामना पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन और विश्वविद्यालय कुलगीत के सामूहिक गायन के साथ हुई। संचालन शोध छात्रा कृति त्रिपाठी ने किया, जबकि स्वागत भाषण शोध छात्र शुभम मिश्र ने और संयोजन डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने संभाला।

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